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CCNA in Hindi : VPN (Virtual Private Network)

VPN (Virtual Private Network) 

  • Introduction to VPN (Virtual Private Network) in Hindi 
  • Benefits of VPN (Virtual Private Network) in Hindi 
  • Types of VPN's (Virtual Private Networks) in Hindi 
  • How VPN (Virtual Private Network) works in Hindi 

Introduction to VPN (Virtual Private Network) 

Virtual private network एक ऐसी technology है जो public network (Internet) यूज़ करते हुए 2 hosts के बीच में connection establish करती है जिनमें से एक server और दूसरा host होता है। ये technology एक tunnel connection establish करती है जिसमे data encrypted रहता है। इस technology से network private और secure होता है। आइये अब जानने का प्रयास करते है की VPN की आवश्यकता क्यों पड़ी?

मान लीजिये एक बहुत बड़ी company है जिसके एक ही शहर में अलग अलग जगह पर offices है। इसी शहर में आप इस company का main office मान लीजिये जिसे आप server कह सकते है और बाकि offices को client मान लीजिये। इस company के लिए इसका data बहुत महत्वपूर्ण है और company चाहती है की सभी offices को एक private network में रखा जाये ताकि कोई unauthorized person data को access न कर सके। Internet एक public network है इसलिए company internet को यूज़ नहीं करना चाहती है।

यदि company इन offices के बीच में एक private और secure connection establish करना चाहती है तो इसके लिए company को एक office से दूसरे office तक wire के through connection establish करने होंगे। लेकिन ये process बहुत ज्यादा expensive और time consuming होगा। साथ ही ये technology reliable भी नहीं होगी। यदि कभी wire में कोई problem होती है तो एक particular office connection बिलकुल terminate हो जायेगा। फिर जब तक आप ये नहीं देख लेते की एक office से लेकर दूसरे office तक wire में कँहा problem है तब तक आप कुछ नहीं कर सकते है। ऐसी situation में ये company क्या कर सकती है?

ऐसी situation में ये company VPN technology यूज़ कर सकती है। VPN technology एक ऐसी technology होती है जिसमे internet के माध्यम से अलग अलग hosts को जोड़ा जाता है। लेकिन ये connection उतना ही private और secure रहता है जितना की कोई hard wired network हो। साथ ही ये connection reliable भी होता है। आइये जानने का प्रयास करते है की VPN क्या क्या benefits provide करती है।

Benefits of VPN (Virtual Private Network) 

VPN को आप किसी company के लिए भी यूज़ कर सकते है और यदि आप चाहे तो इसे अपने home network के लिए भी यूज़ कर सकते है। जैसे भी आप VPN को यूज़ करें इसे यूज़ करने के बहुत सारे benefits होते है आइये इनके बारे में जानने का प्रयास करते है। 

Secure 

VPN technology आपको unauthorized access से advanced security provide करती है। इसके लिए VPN अलग अलग तरह के encryption और authentication protocols यूज़ करती है। SSL (Secured Socket Layer) और IPsec VPN category में ही आते है। 

less expensive 

एक office से दूसरे office को wires से जोड़ने के बजाय यदि आप एक internet connection ले और उस पर VPN connection establish करे तो ये आपको point to point (wired) connection से 10 गुना less expensive पड़ेगा।

Reliable 

VPN एक reliable technology है। मान लीजिये यदि connection के बीच में कोई router down हो गया है तो ऐसी situation में आपका connection terminate नहीं होगा। ऐसी situation में VPN के द्वारा automatically एक नया route ढूंढा जाता है। 

Easy & Fast to Establish           

Wired connection के comparison में VPN technology को establish करना बहुत ही आसान और fast होता है। जँहा wired connection में आपको दिनों लग सकते है वही VPN technology को मिनटों से घंटो में establish किया जा सकता है। 

Can be Scaled 

VPN network को आप आसानी से जरुरत के हिसाब से बड़ा या छोटा कर सकते है।


Types of VPN's (Virtual Private Networks) 

VPN's को business में उनके role के अनुसार 3 categories में divide किया गया है। इन categories के बारे में नीचे दिया जा रहा है।

Remote Access VPN 

Remote access VPN के द्वारा कोई भी employee या worker organization के network को कभी भी और कँही से भी access कर सकता है। ये employees workers इस network में available सभी resources को यूज़ कर सकते है। किसी भी organization का network secured रहता है इसमें किसी भी बाहर के network से कोई भी host connect नहीं हो सकता है। Remote access VPN के द्वारा जब कोई host connect करता है तो VPN उसे ऐसे represent करती है जैसे की वह कोई local host हो।             

Site to Site or Intranet VPN 

Site to Site VPN के द्वारा किसी organization के अलग अलग offices एक दूसरे के साथ किसी public network जैसे की internet के द्वारा connection establish करते है। Site to site VPN एक office के resources को दूसरे office के hosts को available करवा देता है।     

Extra-net VPN 

जब कोई organization किसी दूसरे organization के साथ मिलकर काम करती है तो ऐसी situation में वह extra-net VPN यूज़ कर सकती है। इस तरह के VPN से एक organization दूसरे organization को अपने resources का limited access provide कर सकती है।    

Working of VPN (Virtual Private Network) 

VPN technology host और server के बीच में एक tunnel create करती है। इस tunnel के through data server से different hosts को pass किया जाता है। इस tunnel से जाने वाला सारा data encrypted form में होता है। ऐसे VPN technology double layer security provide करती है। उदाहरण के लिए निचे दिए गए diagram को देखिये। 

Working-of-VPN-in-Hindi
      
जैसा की आप ऊपर दिए गए diagram में देख रहे है VPN technology internet का एक base के रूप में उपयोग करती है और एक host से दूसरे host के बीच में tunneling के द्वारा secure और reliable connection establish करती है। VPN की working को समझने के लिए आपको tunneling और encryption का concept समझना होगा। इनके बारे में निचे दिया जा रहा है। 

Tunneling

Tunneling एक technology है। इस technology में किसी protocol (TCP/IP, UDP) के data-gram में tunneling protocol (PPTP, L2TP) का packet encapsulate किया जाता है। कुछ common tunneling protocols के नाम निचे दिए जा रहे है।
  • PPTP (Point-to-Point Tunneling Protocol)      
  • L2TP (Layer two tunneling protocol) 
  • GRE (Generic Routing Encapsulation)

Encryption

जैसा की आप जानते है की VPN technology public network (Internet) को base बनाकर एक private network create करती है। लेकिन public network इतना secure नहीं होता है। VPN को secure बनाने के लिए encryption process के द्वारा data को encrypt किया जाता है। Encryption 2 प्रकार का होता है। इनके बारे में निचे दिया जा रहा है। 
  • Symmetric encryption - इस तरह के encryption में data को encrypt और decrypt करने के लिए एक common shared key यूज़ की जाती है। 
  • Asymmetric encryption - इस तरह के encryption में data को encrypt और decrypt करने के लिए अलग अलग keys यूज़ की जाती है।   

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