C in Hindi : Command Line Arguments

  • Introduction to C command line arguments in Hindi
  • Syntax of C command line arguments in Hindi
  • Example of C command line arguments in Hindi

Introduction to C Command Line Arguments

ऐसे arguments जो किसी C program में main() function को pass किये जाते है command line arguments कहलाते है। इन arguments को program को run करते समय pass किया जाता है। 

अभी तक आपने C programs में कई बार main() function define किया होगा। किसी भी program में main() function सबसे महत्वपूर्ण function होता है। लेकिन क्या आप जानते है की किसी normal function की ही तरह main() function को भी arguments pass किये जा सकते है? 

किसी program में main() function को arguments pass करना कई कारणों से लाभदायक हो सकता है। उदाहरण के लिए आप कोई ऐसी application create करना चाहते है जो commands को execute करे और उनके अनुसार operations perform करें तो इसके लिए main() function को argument pass करके उसमे अपना मनचाहा operation perform किया जा सकता है। 

इसके अलावा इससे एक benefit यह और है की आप program को run करने से पूर्व ही आप बता देते है की आप क्या करना चाहते है। जब आप command line arguments का प्रयोग करते है तो आपको input window के लिए wait करने की आवश्यकता नहीं होती है आप program के बाहर से ही input provide कर देते है और उसी के अनुसार program execute हो जाता है। 

Command line arguments द्वारा किसी program को बाहर से ही control किया जा सकता है और commands (arguments) pass करके application को चलाया जा सकता है। 

उदाहरण के लिए आप कोई ऐसा program create कर रहे है जो किसी process को start और stop करता है तो इसके लिए आप command line arguments use कर सकते है और program को run करते समय ही start या stop commands द्वारा process और control कर सकते है। 

Syntax of C Command Line Arguments

C programs में command line arguments define करने के लिए आप निचे दिया जा रहा syntax use कर सकते है। 

int main(int argc, char *argv[])
{
    //rest of code
}

ऊपर दिए गए code में main() function को command line arguments के साथ define किया गया है। जब आप अपने program में command line arguments accept करना चाहते है तो इसके आप लिए argc और argv parameters define करते है जैसा की ऊपर दिए गए code में किया गया है।

इसमें argc एक integer number होता है जो यह बताता है की कितने arguments main() function को pass किये जा रहे है। इसके अलावा argv एक pointer array होता है जो pass किये गए arguments को point करता है।

एक बात आपको हमेशा ध्यान रखनी चाहिए की argv[] array की zero index (argv[0]) हमेशा program का नाम बताती है और first index (argv[1]) पहले command line argument को दर्शाती है।

Command line argument pass करने के लिए आप program के नाम के बाद arguments को comma से separate करके लिखते है। इसका syntax निचे दिया जा रहा है।

program-name arg1,arg2, arg3…argN;

यदि कोई argument नहीं pass किया जाता है तो argc की value 1 रहती है। यदि आप एक argument pass करते है तो argc की value 2 हो जाती है। इसी प्रकार आप जितने arguments pass करते है argc की value उनसे एक अधिक होती है।

Example of C Command Line Arguments

C language में command line arguments के use को निचे उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है।

#include<stdio.h>

/* Defining command line arguments in main() function */
int main(int argc, char *argv[])
{
    printf(“Hello %s”,argv[1]);
}

ऊपर दिए गए program को execute करते समय program के नाम के बाद user argument के रूप में अपना नाम pass करता है और यह program user को welcome message show करता है।

cmdlineDemo Reader

ऊपर दिया गया उदाहरण निचे दिया गया output generate करता है।

Hello Reader

C in Hindi : Constants

C Constants  

  • Introduction to C constants in Hindi
  • Creating C constants in Hindi

Introduction to C Constants 

Constants वो variables होते है जिनकी value program execution के दौरान किसी प्रकार भी change नहीं होती है। जब भी आप कोई constant declare करते है तो program के execution के दौरान उसकी value fixed रहती है। यदि इसकी value change करने की कोशिश की जाती है तो program में error आ जाती है।

C language में constants दो types के होते है।

  • Constant Literals 
  • Constant Variables

इन दोनों types के constants के बारे में निचे detail से बताया जा रहा है।

Constant Literals 

Constant literals ऐसी values होती है जिन्हें आप program में directly use करते है। उदाहरण के लिए निचे दिए गए code को देखिये।

y = x+2;

ऊपर दिए गए statement में 2 एक constant literal है। इसे program में directly use किया गया है। इसे program के execution के दौरान change नहीं किया जा सकता है।

Constant literals को आप ऐसी direct values समझिये जिन्हें change नहीं किया जा सकता है। आम तौर पर literal constants को use करने की सलाह नहीं दी जाती है।

मान लीजिये आपने एक literal constant का प्रयोग program में कई जगह पर किया है, अब यदि आपको इस constant को change करने की आवश्यकता होती है तो आपको उसे manually ढूंढ कर program में हर जगह change करना होगा।

इसलिए literal constants का प्रयोग आपको कम से कम करना चाहिए।

Constant Variables 

Constant variables को आप खुद variables की तरह declare करते है। Constant variables को प्रयोग करने का फायदा ये है की यदि आपको बाद में constant को change करना पड़े तो आपको इसे program में कई जगह पर change करने की आवश्यकता नहीं होती है आप सिर्फ constant variable की value change करते है और वह program में हर जगह अपने आप change हो जाती है।

Constant variables को आप दो प्रकार से declare कर सकते है। इनके बारे में निचे बताया जा रहा है। 

Using #define Directive   

#define एक pre processor directive है इसे use करके आप constant variables declare करते है। इस directive द्वारा constant variables program की शुरआत में main function से पूर्व ही declare किये जाते है। इस directive द्वारा define किये गए constant variables को आप program में कँही भी use कर सकते है।

Constant variables के उपयोग को निचे उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है।  

# include <stdio.h>

/* Defining constant */
#define result 10
int main()
{
    int a=5, b=6;
 
    /* Wrong, (error) Value of constant result variable can not be changed. */
    result = a + b;  
    printf(“%d”, result);
    
    return 0;
}

ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है।

error : lvalue required as left operand of assignment 
           result = a + b;
                     ^

Using const Keyword 

C language में const keyword के द्वारा भी आप constant variables declare कर सकते है। यदि आप सिर्फ किसी function में ही constant variable का प्रयोग करना चाहते है तो इस keyword के द्वारा constant variable declare कर सकते है।

C language में const keyword के use को निचे उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है।

#include <stdio.h>
int main()
{

const int a=5;

const int b=6;


int c;

/* Adding two constants */

c = a+b;
printf(“Result is : %d”,a);
return 0;
}
ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है। 
Result is : 11 

Types of C Constants

C language में निचे दिए जा रहे 5 type के constants होते है। 
  1. Integer Constants
  2. Floating-Point Constants
  3. Character Constants
  4. String Constants
  5. Enumeration Constants
इनके अलावा C language में escape sequence characters को भी constants ही माना जाता है।

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C in Hindi : typedef Keyword

C typedef Keyword

  • Introduction to C typedef keyword in Hindi 
  • Syntax of C typedef keyword in Hindi 
  • Example of C typedef keyword in Hindi 

Introduction to C typedef Keyword 

C language में typedef एक keyword है। यह keyword किसी data type के existing name को नया नाम देने के लिए use किया जाता है। इस keyword द्वारा आप built in और user defined दोनों तरह के data types को नया नाम दे सकते है। 

इस keyword को मुख्यतः user defined data types जैसे की structure आदि के साथ प्रयोग किया जाता है। जब program में data types के नाम जटिल हो तो इस keyword द्वारा आप उनके सरल नाम define कर सकते है। इस keyword के प्रयोग से code short हो जाता है और program की readability बढ़ती है। 
उदाहरण के लिए निचे दिए गए structure को देखिये।

struct Employee
{
    char Name[20];
    int Age;
};

ऊपर दिए structure के variables आप इस प्रकार create कर सकते है।

struct Employee e1;

ऊपर दिए गए declaration में e1 को create करने के लिए struct Employee भी declare किया गया है। आप जब भी structure का variable create करेंगे तो इसी प्रकार करेंगे।

लेकिन आप typedef keyword के प्रयोग से इस declaration का छोटा और आसान word बना सकते है। ऐसा करके आप हर बार उसी word को use कर सकते है।

Syntax of C typedef Keyword 

C language में typedef keyword का general syntax निचे दिया जा रहा है।

typedef-keyword data-type-name new-name;

जैसा की आप ऊपर दिए गए syntax में देख सकते है सबसे पहले typedef keyword declare किया जाता है। उसके बाद उस type का नाम declare किया जाता है जिसे आप change करना चाहते है। आखिर में वह नया नाम लिखा जाता है जिसे आप use करना चाहते है।

Example of C typedef Keyword 

C language में typedef keyword के उपयोग को निचे उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है।

#include<stdio.h>

struct Employee
{
     char Id;
     int Salary;
};

int main()
{

   /* Changing struct Employee to emp */
   typedef struct Employee emp;

   emp e1;

   e1.Id=101;
   e1.Salary=10000;

   printf(“Employee Id is %d and salary is %dn”,e1.Id,e1.Salary);

   return 0;
}

ऊपर दिए गए उदाहरण में typedef keyword द्वारा struct Employee declaration को emp में convert किया गया है। यह उदाहरण निचे दिया गया output generate करता है।

Employee Id is 101 and salary is 10000
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C in Hindi : Installing C Compiler

C Compiler Installation

  • Introduction to Dev C++ compiler in Hindi
  • Installing Dev C++ compiler in Hindi 
  • Working with Dev C++ compiler in Hindi

Introduction to Dev C++ Compiler

जैसा की आपको पता है एक compiler programmer द्वारा किसी programming language में लिखे गए code को machine executable form में convert करता है। C language के लिए अलग अलग platforms के अनुसार बहुत से compilers available है।

Dev C++ एक (Integrated Development Environment) है। इसके माध्यम से c या c++ में programming करना बहुत ही आसान हो जाता है। ये IDE आपको graphical user interface provide करती है और साथ ही आपको automatic code completion, syntax highlighting और एक साथ कई files के साथ work करने की ability provide करती है। 
Best Hindi Tutorials के readers के लिए इस ही IDE को recommend किया जाता है। हालाँकि अभी भी कई university और colleges में Turbo C compiler को use किया जा रहा है लेकिन ये IDE आपको better development environment provide करता है इसलिए आपको इसे ही use करना चाहिए।

Installing Dev C++ compiler 

इस IDE को आप Dev-C++ Download Page से download कर सकते है। इसे install करना निचे steps के द्वारा समझाया जा रहा है।

1.  जैसे ही आप setup.exe file को download करके उस पर click करेंगे तो आपको निचे दी गयी window show होगी।

Installing-C-Compiler-1
ऊपर दी गयी window में आपको अपनी preferred language select करनी है। Default language English है। यँहा पर आप OK click करेंगे।  
2. इसके बाद आपको निचे दी गयी screen show होगी। 
Installing-C-Compiler-2
      
ये licence agreement की window है। यँहा पर आप I Agree button पर click करेंगे। 
3. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी।  
Installing-C-Compiler-3
इस window में आपको type of installation select करना होता है। ये window आपको 3 (Full, Typical और Custom) options provide करती है। आप अपनी need के according कोई भी installation type select कर सकते है। Installation type select करने के बाद आप next पर click करेंगे।   
4. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-4
इस window में आप वह location बताते है जँहा पर आप Dev C++ को install करना चाहते है। By default ये c drive में install होगा। Location set करने के बाद आप Install button पर click करेंगे। 
5. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-5
      
ये installation progress window है। इस window में आपको कोई action नहीं लेना है।  
6. ऊपर दी गयी progress window के complete होते ही आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-6
ये completion window है यँहा पर आपको Finish button पर click करना होगा। 
7. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
 Installing-C-Compiler-7
  
ये first time configuration window होती है। इस window में आप language और Dev c++ की theme select करते है। इसके बाद आप next button पर click करेंगे। 
8. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-8
इस window में आपसे पूछा जा जायेगा की क्या आप Dev C++ को Header files के साथ use करना चाहते है। यँहा पर आप Yes, I want to use this feature option को select करेंगे। 
9. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-9
   
इस window में आपसे cache create करने के लिए पूछा जाएगा। इस window में आप Yes, create the cache option select करेंगे। 
10. इसके बाद आपको निचे गयी window show होगी।  
Installing-C-Compiler-10
ये window आपको बताती है की Dev C++ को successfully configure कर लिया गया है। इस window में आप OK button पर click करेंगे। 
11. इसके बाद आपको निचे दी गयी window show होगी। 
Installing-C-Compiler-11
   

ये Dev C++ की window है। अब आपके PC में Dev C++ successfully install हो चूका है।

Working with Dev C++ Compiler 

यँहा पर मैं आपको Dev C++ compiler में एक simple program बनाकर उसे execute करके बता रहा हूँ जिससे आप इसके basic uses को समझ पाएंगे।

सबसे पहले आप Dev C++ compiler को open करेंगे। इसके बाद आप एक नयी file create करेंगे। नयी file create करने के लिए आप Menu bar में File option पर click करेंगे और इसके बाद new menu में जाकर source file पर click करेंगे। जैसा की निचे दी गयी window में show किया गया है।

Working-with-C-Compiler-1
जैसे ही आप Source File option पर click करेंगे right side में editor open हो जायेगा। जैसा की निचे दी गयी image में show हो रहा है। 
Working-with-C-Compiler-2

यँहा पर आप अपना code लिखते है। जैसे की निचे गयी image में show हो रहा है।

Working-with-C-Compiler-3

Code लिखने के बाद आप अपने program को compile करते है। इसके लिए आप Execute menu में जाकर compile option पर click करते है। जैसा की निचे दी गयी image में दिखाया गया है।

Working-with-C-Compiler-4

Compile option पर click करते ही आपको एक window show होगी जिसमे आपको इस program को save करने के लिए कहा जाएगा। जैसे की निचे दी गयी image में show हो रहा है।

Working-with-C-Compiler-5

जैसे ही आप इस program को किसी name के साथ save करते है program compile होना शुरू हो जाएगा। यदि program में कोई error है तो वह editor के निचे show होगी नहीं तो program successfully compile हो जाएगा और Done का message show करेगा।

Program के compile होने के बाद आप इसे run करेंगे। Program को run करने के लिए आप Execute menu में जाकर run option पर click करेंगे। इसके बाद आपका program run हो जाएगा और आपको console window में output show होगा। जैसा की निचे दी गयी image में show हो रहा है।

Working-with-C-Compiler-6

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C in Hindi : Type Casting

C Type Casting

  • Introduction to C type casting in Hindi 
  • Implicit type conversion in Hindi 
  • Explicit type conversion or type casting in Hindi

Introduction to C Type Casting 

C language में type casting एक ऐसी process होती है जिसमें एक data type के variable की value का दूसरे data type में conversion होता है। कई बार ये variables automatically convert हो जाते है और कई बार आप इन्हें manually भी convert करते है।

कई बार बहुत से students type casting या type conversion के बीच confuse हो जाते है। इसलिए मैं आपको बताना चाहूंगा की C language में एक data type जब दूसरे data type में automatically बदलता है तो उसे type conversion कहा जाता है।

लेकिन जब आप explicitly या manually type cast operator का use करते हुए किसी data type के variable को दूसरे data type में बदलते है तो उसे type casting कहा जाता है।

C language में casting/conversion की process 2 प्रकार की होती है।

From Higher Type to Lower Type 

इस तरह की casting में एक ऐसे data type का variable जो अधिक size की value store करता है उसको ऐसे data type में convert किया जाता है जो कम size की value store करता है। इस तरह के conversion में data का loss होता है। 

int result = 5/2;  /* Higher type to lower type  */
उदाहरण के लिए यदि आप 5 को 2 से divide करेंगे तो 2.5 result प्राप्त होगा। यदि इस result को आप किसी integer variable में store करने का प्रयास करेंगे तो सिर्फ 2 ही result के रूप में store होगा। यँहा पर .5 का loss हुआ है। ये एक higher type (float) से lower type (int) में conversion है।    

From Lower Type to Higher Type 

इस तरह की casting में कम size की value store करने वाले data type के variable को अधिक size की value store करने वाले data type में convert किया जाता है।

long result = 2+2;  /* Lower to higher type */
उदाहरण के लिए यदि आप किसी integer result को long type के variable में store करने का प्रयास करते है तो ऐसी casting lower type से higher type casting होती है। 
  

Type Conversion (Implicit/Automatic)

जैसा की आपको पता है type conversion automatically compiler द्वारा perform किया जाता है। इसमें आपको कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होती है और ना ही इसमें किसी तरह के operator की आवश्यकता होती है।

ये compatible type के बीच में ही perform होता है। Compatible types ऐसे data types होते है जिनमें type conversion possible है।

#include <stdio.h>
#include <conio.h>
int main()
{
   int num = 5;
   float fnum;

   /* Converting automatically from integer to float */
   fnum = num; 
   printf(“Number is :%f”,fnum);

   return 0;

}

Number is : 5.000000 

Type Casting (Explicit/Manually)

Type casting आप खुद perform करते है। इसके लिए आप type cast operator यूज़ करते है। C language में () को type cast operator कहा जाता है। इस operator को आप किसी expression से पहले use करते है।

इन brackets में आप उस data type का नाम लिखते है जिसमें आप expression के result को convert करना चाहते है।

#include <stdio.h>
int main()
{
    int num = 5;
    char cnum;

    /* Manually casting integer type to char */
    cnum = (char) num;

    printf(“Number is : %d”,(int)cnum); /* Type Casting Again */

    return 0; 
}

Number is : 5 

Strings Type Casting Functions 

C language string के लिए अलग से data type नहीं provide करती है। C में string के लिए आप character array define करते है। इसलिए casting operator द्वारा string को cast करना संभव नहीं है।

Strings के साथ casting operations perform करने के लिए C language आपको 5 built in functions provide करती है। इन functions को use करने के लिए आपको program में <stdlib.h> header file include करनी होती है। इन functions को use करके आप strings के साथ भी casting perform कर सकते है।   

  

atof() 

ये function string data type को float data type में convert करने के लिए use किया जाता है। ये function एक float value return करता है इसमें आप argument के रूप में एक string pass करते है। 
double atof(const char* string);

atoi()

ये function string data type को integer data type में convert करने के लिए use किया जाता है।

int atoi(const char* string);

atol() 

ये function string data type को long data type में convert करने के लिए use किया जाता है।

long int atol(const char* string);

itoa()

ये function integer data type को string data type में convert करने के लिए use किया जाता है। इस function में argument के रूप में आप एक integer value, एक character array और  number system base pass करते है।  
char* itoa(int value, char* string, int base);

ltoa()

ये function long data type को string data type में convert करने के लिए use किया जाता है।

char* ltoa(long value, char* string, int base);
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C in Hindi : Console I/O

C Console I/O

  • Introduction to C console I/O in Hindi
  • Different C console I/O functions in Hindi

Introduction to C Console I/O

C language में input और output को 2 तरीके से process किया जा सकता है। एक तो आप console के माध्यम से input दे सकते है और output देख सकते है। C language में input और output के लिए ये standard और default तरीका होता है।

Console एक black window होती है जो input के समय compiler के द्वारा show की जाती है। Program के execution के बाद उसका result भी इसी window में दिखाया जाता है।   

दूसरे तरीके में आप disk files को यूज़ करते हुए भी input दे सकते है और उनमें output भी store कर सकते है। ये totally application की need पर depend करता है की आप कौनसा तरीका यूज़ करते है। 
Console के माध्यम से आप इस तरह का data input कर सकते है।

  1. Strings 
  2. Numbers
  3. Characters
  4. All primitive types of data (float,  double, long etc)

Console I/O के लिए 2 standard device होते है।

  1. Keyboard – Keyboard एक standard input device है। By default एक C program keyboard के माध्यम से ही input लेता है। 
  2. Monitor – Monitor (screen, LCD) एक standard output device होता है। यदि आप कोई दूसरा तरीका यूज़ नहीं करते है तो by default एक C program monitor पर ही output दिखाता है। लेकिन आप चाहे तो किसी external device पर भी output show कर सकते है। 

C Console I/O Functions 

Console के माध्यम से input output perform करने के लिए C language आपको built in functions provide करती है। इनमें से कुछ के बारे में आप पहले भी पढ़ चुके है। निचे इनके बारे में उदाहरण सहित समझाया जा रहा है। 

scanf() 

scanf() एक input function है। ये user से keyboard के माध्यम से input लेने के लिए use किया जाता है। इसके माध्यम से आप user से सभी तरह के primitive types का data input के रूप में ले सकते है। इस function का general syntax निचे दिया जा रहा है।

scanf(“%d”,&variable-name); 
ऊपर दिए गए syntax में %d एक format specifier है जो compiler को बताता है की input के रूप में integer value ली जायेगी। हर type के लिए C language में पहले से ही एक format specifier define किया गया है। कुछ common format specifiers की list निचे दी जा रही है। 
  1. %d – जब आप किसी integer variable में value store करना चाहते है तो इस format specifier को यूज़ करते है।  
  2. %c – किसी character variable में value store करने के लिए आप %c format specifier को use करते है।  
  3. %f – Float variables में values store करने के लिए आप %f format specifier यूज़ करते है।  
  4. %s – Strings के लिए आप %s format specifier यूज़ करते है।    
  5. %u – Unsigned integers के लिए आप इस specifier को use करते है। 
  6. %ld – Long int को specify करने के लिए यह specifier use किया जाता है।  

& symbol memory के संदर्भ में यूज़ किया जाता है। इसे address of operator कहा जाता है। जब आप एक variable को initialize करते है तो उस variable के नाम से memory में space allot होता है। & के माध्यम से उस space को target किया जाता है। आइये अब scanf() function के use को एक उदाहरण के माध्यम से समझने का प्रयास करते है।

#include <stdio.h>
int main()
{
    int num;
    printf(“Enter a number:”);
 
    /* Taking input from user and storing in num using scanf() function */
    scanf(“%d”,&num);

    printf(“nYour entered number is: %d”,num);

    return 0;

}    

ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है।

Enter a number :
7
Your entered number is : 7 

printf()

printf() एक output function है। ये user को monitor के माध्यम से output show करने के लिए यूज़ किया जाता है। इस function के द्वारा आप सभी तरह के primitive types का data यूज़र को show कर सकते है।

इस function में आप print करने के directly string भी pass कर सकते है या फिर कोई variable भी pass कर सकते है जिसकी value आप print करना चाहते है। String को double quotes में लिखा जाता है। आप चाहे तो string और variable दोनों एक साथ भी pass कर सकते है। 

Variables की value को किसी निश्चित जगह पर print() करने के लिए आप format specifier भी यूज़ कर सकते है।   
इसका general syntax निचे दिया जा रहा है। 
printf(“string/variable”);

or

printf(“string format-specifier string”,variable-name)

printf() function के यूज़ को निचे उदाहरण के माध्यम से समझाया जा रहा है।

#include <stdio.h>
int main()
{
   int a=5;
   int b=4;
   int result;
   
   result = a+b;
 
   /* Printing all variable values using printf() function */
   printf(“Sum of %d and %d is : %d”,a,b,result);

  return 0;

}

ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है।

Sum of 5 and 4 is :  9

getchar() & putchar()

getchar() function console के माध्यम से single character read करता है। इस character को ये integer के रूप में return करता है। यानी इसके result को आप किसी integer variable में store करते है। C में characters integer type के होते है। C में int और char को आसानी से assignment के द्वारा ही cast किया जा सकता है।

चाहे आप कितने भी characters enter करें लेकिन ये एक बार में एक ही character read करता है। यदि आप एक से अधिक characters read करना चाहते है तो इस function को loop में use कर सकते है।

putchar() function को इसमें pass किये गए character को screen पर display करने के लिए use किया जाता है। ये function भी एक बार में एक character ही screen पर display करता है। यदि आप एक से अधिक characters screen पर display करना चाहते है तो इस function को loop में use कर सकते है।

इन दोनों functions को निचे उदाहरण के माध्यम से समझाया गया है।

#include <stdio.h>
int main()
{
   char data;
   printf(“Enter some characters. To exit enter @ symbol.”);
   while(data != ‘@’)
   {
   
       /* Taking character from user using keyboard */
       data = getchar();

       /* Displaying character to screen */

       printf(“nYou entered this character :”,putchar(data));   
   }  
   return 0;
}

ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है। 

Enter some characters. To exit enter @ symbol.
a
You entered this character : a
b
You entered this character : b
@
You entered this character : @

gets() and puts()

gets() function keyboard से string read करने के लिए use किया जाता है। Read की गयी string को एक character array में store किया जाता है। ये function argument के रूप में character array लेता है।  
puts() function के माध्यम से एक string को screen पर display किया जाता है। इस function में भी argument के रूप में character array pass किया जाता है। 
इन दोनों functions को निचे उदाहरण के माध्यम से समझाया गया है।  
#include <stdio.h>
int main()
{
   char arr[60];
   printf(“Enter a string : “);

   /* Reading string */

   gets(arr);
   
   printf(“nYou entered following string:”)

   /* Writing string */

   puts(arr);
  
   return 0;
}  
ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है। 
Enter a string :  
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C in Hindi : Flow Chart

C Flowchart

  • Introduction to flowchart in Hindi 
  • Symbols of flowchart in Hindi 
  • Examples of flowchart in Hindi

    Introduction to Flowchart 

    Flow chart किसी process का graphical representation होता है। C language के सन्दर्भ में यह program के execution flow का graphical presentation होता है। 

    प्रायः जब भी आप कोई program लिखते है तो बिना किसी flow chart के लिखते है। किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा इसे समझना असंभव होता है। Flow chart के माध्यम से आप अपने program को graphically represent करते है। ऐसा करने से कोई भी आपके program के logic को आपके बिना भी समझ सकता है।        
    जब आप किसी company के लिए programmer के रूप में काम करते है तो coding से पहले flowchart बनाना अनिवार्य होता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि companies में अक्सर programmers बदलते रहते है।

    आपके द्वारा बनाये गए किसी project को कोई दूसरा व्यक्ति आसानी से समझ सके और उस पर काम कर सके इसलिए आपको flow charts create करना अनिवार्य होता है।    

    Flow chart create करने का एक महत्वपूर्ण कारण ये है की इससे आपको program की गहरी समझ प्राप्त होती है। आप coding से पहले ही उसमे आने वाली errors और result को देख पाते है।

    यदि flowchart completely prepare कर लिया गया है तो coding सिर्फ एक simple process रह जाती है जिसमे programmer को flowchart के अनुसार code लिखना होता है।

    Flow chart की सबसे बड़ी विशेषता ये होती है की flowchart किसी विशेष programming language के लिए नहीं होता है। Flow chart को देखकर आप किसी भी programming language में process को implement कर सकते है।

    बड़ी companies project develop करने से पहले flow chart पर बहुत सा समय लगाती है। Flowchart आपके program का blueprint होता है। ये मकान बनाने से पहले उसका नक्शा बनाने जैसा होता है। जितना समय coding में लगता है उससे कई अधिक समय flowchart में लगाया जाता है। Algorithms भी flow chart के अनुसार ही बनायीं जाती है।

    हर अच्छे programmer को इसे सीखना चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही powerful tool है। आज कल बहुत से modern text editors जैसे की Microsoft word आदि flow chart create करने के लिए built in options provide करते है। आप इन्हें यूज़ करके भी flow charts create कर सकते है।

    Symbols of Flowchart 

    किसी program को graphically समझाने के लिए कुछ symbols का प्रयोग किया जाता है। ये symbols आपको पहले से provide किये गए है। इन्हें flow chart symbols कहा जाता है। हर symbol का एक मतलब होता है जिससे flow chart देखने वाला आसानी से उसे समझ सकता है। निचे आपको table के माध्यम से flow chart symbols के बारे में बताया जा रहा है।

    Name
    Symbol  
    Explanation 
    Begin/End 
    ये oval symbol होता है। इसे terminal symbol भी कहा जाता है। इसे flow chart को start और end करने के लिए यूज़ किया जाता है। किसी भी processing से पहले program का start और end point define करना अत्यंत आवश्यक है।    
    Processing 
    जब भी आप कोई execution करते है या फिर कोई ऐसा statement जिसमे processing हो रही है उसे processing symbol से दर्शाया जाता है।  
    Input/Output 
    Program के input और output को  दर्शाने के लिए आप parallelogram का इस्तेमाल करते है।  
    Decision 
    Program में decision making statements को दर्शाने के लिए diamond symbol यूज़ किया जाता है।  
    Arrow (Flow) 
    Program का flow दिखाने के लिए arrow symbol यूज़ किया जाता है। इसे हर symbol के बाद flow दिखाने के लिए यूज़ किया जाता है।  

    Example of Flow Chart

    मान लीजिये आप एक addition का program बनाना चाहते है जो user से 2 numbers read करता है और उन्हें add करके result display करता है।इसके लिए आप flow chart इस प्रकार बनाएंगे। 
    ऊपर दिए गए flowchart में सबसे पहले oval symbol से flowchart को start किया गया है। इसके बाद rectangle symbol के द्वारा 3 variables (num1, num2 और Result) declare किये गए है। इसके बाद parallelogram द्वारा num1 और num2 को read करने की process को दर्शाया गया है।

    इसके बाद वापस rectangle symbol के द्वारा दोनों numbers के addition और Result variable को assign करने की process को दर्शाया गया है। इसके बाद parallelogram द्वारा result को display करने की process को दर्शाया गया है।

    सबसे आखिर में terminal symbol द्वारा flowchart को stop किया गया है। इस flow chart को देखकर कोई भी व्यक्ति आसानी से addition के program को किसी भी language में बना सकता है।

    आइये flow chart का एक और उदाहरण देखते है। मान लीजिये आप एक program बनाना चाहते है जो दो integer numbers को read करता है और जो उनमें से greater हो उसे display करवाता है। इसके लिए flow chart इस प्रकार create किया जायेगा।

    ऊपर दिए flow chart में सब कुछ पहले की तरह ही है बस diamond symbol के द्वारा condition के according दोनों numbers में से जो number greater है उसे display किया जा रहा है।   

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    C in Hindi : Recursion

    C Recursion

    • Introduction to C recursion in Hindi 
    • Types of C recursion in Hindi 
    • Examples of C recursion in Hindi

    Introduction to C Recursion 

    C language में recursion एक ऐसी process होती है जिसमें एक function खुद को ही call करता है। ऐसा किसी problem को small parts में divide करके solve करने के लिए किया जाता है। ऐसे functions जो स्वयं को call करते है उन्हें recursive functions कहा जाता है।

    मान लीजिये आप किसी problem को solve करने के लिए कोई function create कर रहे है और इसका जो initial result है वो end result नहीं है। End result प्राप्त करने के लिए आपको इस process को वापस repeat करने की आवश्यकता है।

    ऐसी situation में आप same process execute करने के लिए iteration करने के बजाय इसी function को शुरूआती result के साथ call करते है। जब तक end result नहीं प्राप्त हो जाता यह process चलती रहती है। End result को condition द्वारा determine किया जाता है।

    End result प्राप्त होने पर इस process को terminate कर दिया जाता है। यदि इस function को terminate नहीं किया जाता है तो ये infinite time तक चलता जायेगा।

    Advantages of Recursion 

    1. जब आप recursion के द्वारा किसी problem को solve करते है तो आपको बार बार function को call करने की जरुरत नहीं होती है। आप सिर्फ एक बार function को call करते है और end result नहीं आने तक वह स्वयं ही call होता रहता है। 
    2. Iteration के द्वारा problems को solve करना बहुत complex रहता है लेकिन recursion में same problem बहुत ही आसानी से solve हो जाती है।     

    Structure of Recursive Function

    एक recursive function का general structure निचे दिया जा रहा है।

    return type myFunction(Parameters-list)
    {
         statement 1;
         statement 2;
         …
         statement N;
         myFunction(Arguments-list);  //Calling it self , Recursive process.
         …
         other statements;

    Disadvantages of Recursion 

    हालाँकि recursion के द्वारा problem कम code में आसानी से solve की जा सकती है लेकिन recursive process की कुछ disadvantages भी होती है। इनके बारे में निचे दिया जा रहा है।   
    1. Slower – Recursive programs साधारण programs से slow होते है। Function को बार बार call होने के लिए और end result show करने में recursive programs को normal programs से अधिक समय लगता है। 
    2. Requires extra memory – साधारण programs की तुलना में recursive programs को execute होने के लिए extra memory की आवश्यकता होती है।     

    Types of Recursion

    C language में recursion 2 type का होता है। दोनों types के बारे में निचे detail से बताया जा रहा है। 

    Direct Recursion

    Direct recursion वह recursion होता है जिसमें एक function स्वयं को call करता है। इस तरह के recursion का general structure निचे दिया जा रहा है।

    return_type MyFunction(parameter-list)
    {
          ….statements;
          MyFunction(argument-list);
          …..other statements;

    }

    Indirect Recursion

    Indirect recursion वह recursion होता है जिसमें एक function किसी दूसरे ऐसे function को call करता है जो वापस उसे ही call करता है। इस तरह के recursion का general structure निचे दिया जा रहा है।

    First Function

    return_type FunctionOne(parameter-list)
    {
         ….statements;
         FunctionTwo(argument-list);
         ….other statements;
    }

    Second Function

    return-type FunctionTwo(parameter-list)
    {
           …..statements;
           FunctionOne(argument-list);
           …..other statements;
    }

    Example of Recursion (Factorial)

    Recursion को example के द्वारा समझाने के लिए यँहा पर factorial का उदाहरण दिया जा रहा है। एक factorial number 1 से लेकर जिस भी number का आप factorial पाना चाहते है उस number तक के सभी numbers का  product (multiplication) होता है।

    उदाहरण के लिए आप 5 का factorial calculate करना चाहते है। इसके लिए आपको 1 से लेकर 5 तक के सभी numbers को multiply करना होगा। सभी numbers को multiply करने के बाद जो result प्राप्त होगा वही 5 का factorial होगा।

    1*2*3*4*5 = 120

    C program के द्वारा किसी number का factorial calculate करने के दो तरीके हो सकते है।

    1. Using iteration – इस तरीके में आप 1 से लेकर दिए गए number तक loop चला सकते है और सभी numbers को multiply करके result print कर सकते है।   
    2. Using recursion – इस तरीके में आप एक function create कर सकते है जो दिए गए number को एक number कम से multiply करता है और स्वयं को उसी number के साथ call करता है।    

    इन दोनों ही तरीकों को निचे उदाहरण के माध्यम से समझाया जा रहा है। 

    Calculating Factorial of a Number Using Iteration

    #include <stdio.h>
    int main()
    {
        int num,i;
        int result=1;
      
        printf(“Enter number to find out its factorial…..”);
        scanf(“%d”,&num);

         /* Iterating for loop to calculate factorial */
         for(i=1; i<=num; i++)
         result = result*i;
         printf(“nFactorial of %d is %d”,num,result);
         return 0;
    }
    ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है।

    Enter a number to find out its factorial..
    5
    120

    Calculating Factorial of a Number Using Recursion

    #include <stdio.h>
    int MyFactFunction(int n);
    int num;
    int main()
    {
        printf(“Enter a number to find its factorial…”);
        scanf(“%d”,&num);
        printf(“Factorial of %d is : %d”,num,MyFactFunction(num));
        return 0;
    }
    int MyFactFunction(num)
    {
        if(num >= 1)
            /* Function calling itself to calculate recursion */
            return num*MyFactFunction(num-1);
        else
            return 1;
    }

    ऊपर दिए गए उदाहरण में MyFactFunction एक recursive function है। ये दिए गए number से एक number कम के साथ वापस स्वयं को call करता है और original value से (जिसके साथ function को call किया गया था) multiply करता है।

    ऐसा ये तब तक करता है जब तक original value 1 से अधिक होती है। जैसे ही यह value 1 हो जाती है, यह function terminate हो जाता है। ये program निचे  दिया गया output generate करता है।

    Enter a number to find its factorial….
    6
    Factorial is : 720 
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    Programming in Hindi : What is it?

    What is Programming? 

    • Introduction to programming in Hindi
    • Programming language in Hindi
    • Compiler and Programmer in Hindi

      Introduction to Programming

      India में हर साल लाखों students computer scientists बनते है। हालाँकि एक computer scientist सिर्फ programming ही नहीं करता है, लेकिन programming computer science का बहुत ही महत्वपूर्ण part है। इसलिए एक शुरआती programmer होने के नाते आपके लिए programming और उससे related components का concept ठीक से समझना बहुत जरुरी है।

      कितने ही ऐसे programmers होते है जो programming तो कर रहे होते है लेकिन उनको programming के पीछे का concept नहीं पता होता है। आइये इसके बारे में जानने का प्रयास करते है। 

      आसान शब्दों में कहा जाये तो programming एक ऐसी process होती है जिसमें एक programmer CPU (Central Processing Unit) को कोई task perform करने के instructions देता है। ये task कुछ भी हो सकता है जैसे की दो numbers को add करना आदि।

      Programming कुछ components से मिलकर एक समग्र रूप धारण करती है।

      1. Programming Language 
      2. Compiler और Interpreter
      3. Programmer  

      इन components के बारे में निचे detail से बताया जा रहा है।

      Programming Language  

      मनुष्य जब भी बातचीत करते है तो ऐसा वे किसी language (भाषा) के माध्यम से करते है। एक CPU से भी आप language के माध्यम से ही बातचीत करते है। ऐसी language जो CPU से बात करने के लिए programmers यूज़ करते है programming language कहलाती है।

      वैसे तो CPU सिर्फ binary language (0 और 1 एक की language) को ही समझता है। लेकिन किसी भी मनुष्य के लिए binary language में programming करना असंभव है। इसलिए ऐसी programming languages create की गयी जो simple english में हो जिससे कोई भी मनुष्य आसानी से programming कर सके। 

      ऐसा करने से programming करना बहुत अधिक आसान हो गया। अब जैसा की आप देख सकते है हर कोई basic information प्राप्त करके programming करना सिख सकता है। लेकिन पहले ऐसा संभव नहीं था।  

      Types of Programming Languages

      अब तक 256 से अधिक programming languages develop की जा चुकी है। हर language को एक different purpose के लिए develop किया गया है। Purpose के according programming languages को मुख्यतः 5 categories में divide किया गया है। 
      1. Machine Language/ Machine Code – ये वो code होता है जिसे CPU directly execute (process) करता है। Machine code hexadecimal में होता है। ये hardware के बहुत ही करीब होता है। इसे low level language भी कहा जाता है।     
      2. Assembly Language – Machine code को और भी अधिक readable बनाने के लिए assembly language create की गयी। इसमें labels को add किया गया है जिससे tasks perform करना और भी आसान हो जाता है। ये भी एक low level language होती है।       
      3. High Level Language – High level languages hardware से independent होती है जैसे की C, C++, और java आदि। इन languages का code directly machine code में convert नहीं होता है।     
      4. System Language – इस प्रकार की languages computer को manage करने के लिए use की जाती है। इन्हें low level tasks perform करने के लिए use किया जाता है। जैसे की memory management, process management आदि। 
      5. Scripting Languages –  इस प्रकार की languages system और दूसरी applications के बीच में bridge की तरह काम करती है। जैसे की PHP आदि।    

      Common Programming Languages

      यँहा पर कुछ programming languages की list दी जा रही है। हो सकता है इनमें से कुछ के बारे में आप पहले सुन चुके होंगे। 
      1. C Language 
      2. C++
      3. Java 
      4. C# 
      5. PHP 
      6. Python 
      7. Java Script
      8. Pascal
      9. Visual Basic 
      10. Fortran

      आइये अब जानने का प्रयास करते है की compiler और interpreter क्या होते है।  

        Compiler and Interpreter

        जैसा की मैने आपको बताया computer सिर्फ binary language समझता है और मनुष्य का binary में programming करना बहुत मुश्किल है। इसलिए एक ऐसा program develop किया गया जो programmers से simple English statements के रूप में instructions ले सके और उसे binary में convert करके CPU को पास कर दे। इस program को compiler कहते है।  
        Compiler एक programmer और CPU के बीच bridge की तरह काम करता है। इसे आप translator भी कह सकते है। एक compiler बहुत से tasks perform करता है इनके बारे में निचे दिया जा रहा है।

        • Compiler syntax error check करता है। यदि कोई syntax error होती है तो इसके बारे में programmer को notify किया जाता है।
        • Compiler source code को machine language में convert करता है।    
        • Compiler एक machine executable file generate करता है।  
         आइये अब interpreter के बारे में जानने का प्रयास करते है। 
        कुछ languages compiler की जगह interpreter use करती है। Compiler और interpreter दोनों एक ही काम करते है। फर्क सिर्फ इतना होता है की compiler पुरे source code को एक साथ compile करके machine code generate करता है जिसे एक बार में completely execute किया जा सकता है। जबकि एक interpreter एक एक instructions को machine code में convert करता है और साथ की साथ execute करता जाता है। अपनी आवश्यकता के अनुसार languages compiler और interpreter को use करती है। 
          

        Programmer 

        शुरूआती दिनों में लोग interest की वजह से programming करते थे लेकिन अब इसने एक job का रूप धारण कर लिया है। Programmer वह person होता है जिसे की किसी programming language का ज्ञान होता है। एक programmer अपने ज्ञान को use करते हुए programming language की मदद से real world problem को solve करता है।      

        C in Hindi : Looping

        C Looping 

        • Introduction to C language looping in Hindi 
        • C language while & do-while loop in Hindi 
        • C language for loop in Hindi 

        Introduction to C Language Looping 

        यदि मै आपसे कहुँ की आपको C language in Hindi 10 बार print करवाना है तो ऐसा आप किस तरह करेंगे? सामान्यतया: ऐसा करने के लिए आप 10 printf() statements लिखेंगे। ये एक बेकार approach है। ऐसा करने से programmer का time और computer की memory waste होती है।

        C language में आपको loops provide किये गए है। Loops की मदद से आप एक ही statement को बार बार execute करवा सकते है। हर तरह का loop एक block provide करता है जिसमे वो statements लिखे जाते है जिन्हें आप एक से ज्यादा बार execute करवाना चाहते है।

        Loop 3 चीज़ों से मिलकर बना होता है।

        • Initial variable – ये वो variable होता है जँहा से आप loop को start करते है। ये एक integer variable होता है। इस variable को तब तक increment किया जाता है जब तक की दी गयी condition false ना हो जाये। इस variable को loop की condition में include किया जाता है।        
        • Condition – ये वो condition होती है जो loop को control करती है। जब तक ये condition true रहती है loop execute होता रहता है। जैसे ही ये condition false होती है loop terminate हो जाता है।    
        • Increment – आप कितने number से या कैसे initial variable/condition को increment करना चाहते है ये increment part में define किया जाता है।   

        C language आपको 3 तरह के loops प्रोवाइड करती है। 
        • While loop
        • Do-while loop
        • For loop  
        आइये अब C language में use होने वाले इन loops के बारे में detail से जानने का प्रयास करते है।

        C While Loop

        While एक simple loop होता है ये जब तक condition true रहती है तब तक execute होता है। Condition के false होने पर ये loop terminate हो जाता है। While loop का general syntax नीचे दिया जा रहा है। 
          
        initial variable declaration;
        while(condition)
        {
                    //statements 
                   //increment
        Condition यदि पहली बार में ही false हो तो compiler loop में enter ही नहीं होता है। Loop को totally skip कर दिया जाता है। आइये while loop को एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है।

        #include<stdio.h>
        void main()
        {
           int num=1;

           /* While loop running until num is less than or equal to 10 */
           while(num<=10)
           {
                 printf(“%dt”,num);

                 /* Increasing num to reach the loop terminating condition */

                 num++;
           }

        ऊपर दिए गए उदाहरण में पहले num variable को 1 value के साथ set किया गया है। Loop के अंदर condition दी गयी है की जब तक num 10 से काम या 10 के बराबर ना हो loop execute होता रहे।

        Loop के अंदर हर iteration में num variable की value print की जा रही है। इसके बाद num variable को increment किया जा रहा है। ये program निचे दिया गया output generate करता है।

        1  2  3  4  5  6  7  8  9  10 

        यदि initial variable को increment ना किया जाये तो condition कभी false नहीं होगी। ऐसे में loop infinite time तक चलता जायेगा।

        C Do-while Loop

        Do while loop भी while loop की तरह ही होता है। लेकिन इस loop में पहले condition check होने के बजाय पहले statements execute होते है उसके बाद में condition check होती है। लेकिन ऐसा सिर्फ first time होता है। Do while loop का general syntax नीचे दिया जा रहा है।

        do
        {
            //statements;
           //increment;
        }while(condition);
          
        जैसे ही compiler do section में आता है तो do block के सभी statements execute कर दिए जाते है और initial variable को increment कर दिया जाता है।

        इसके बाद compiler while condition को check करता है। यदि condition true होती है तो do block को वापस execute किया जाता है। लेकिन यदि condition false हो तो loop terminate करके compiler आगे बढ़ जाता है।

        While की condition चाहे true हो या false do block के statements एक बार जरूर execute होते है। आइये do while loop को एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है। 

        #include<stdio.h>
        void main()
        {
             int num=1;
             
             /* Do while loop executing only once */
             do 
             {
                    printf(“%dn”,num);
                    num++;
             }while(num>2);
            printf(“Num is not greater than 2 that is why loop terminated!!”);
          
        उपर दिए गए उदाहरण में हालाँकि condition false है लेकिन फिर भी do block में दिया गया statement एक बार जरूर execute होगा। ये program निचे दिया गया output generate करता है।

        1
        Num is not greater than 2 that is why loop terminated!! 

        C For Loop 

        C loops में for loop सबसे ज्यादा use किया जाता है। ये loop बहुत ही easy होता है और एक single statement में define हो जाता है। इस loop का general structure नीचे दिया जा रहा है। 
        for(initialvariable;condition;increment)
        {
               //statements
           
        For loop के बारे में खास बात ये है की एक statement में तीनों elements define किये जाते है। इस loop को नीचे उदाहरण द्वारा समझाया गया है। 
        #include<stdio.h>
        void main()
        {
            int num;
           
                /* For loop running until num is less than or equal to 10 */
                for(num=1;num<=10;num++)
                {
                      printf(“%d”,num);
                }
        }

        ऊपर दिया गया program निचे दिया गया output generate करता है।

        1  2  3  4  5  6  7  8  9  

        C Loop Control Statements 

        Loop control statements वे statements होते है जो किसी condition के अनुसार loop के execution को change कर देते है। ये statements loop को अपने अनुसार change करने के लिए बहुत उपयोगी होते है। 
        C language में available loop control statements के बारे में निचे बताया जा रहा है। 

        break Statement 

        Loop को terminate करने के लिए break statement का प्रयोग किया जाता है। जब किसी loop के अंदर break statement execute होता है तो वह loop उसी समय terminate हो जाता है और उस loop के बाद के next statement का execution शुरू हो जाता है।

        C break statement का general syntax निचे दिया जा रहा है। 

        break;

        निचे break statement का एक simple उदाहरण दिया जा रहा है।

        #include<stdio.h>

        void main()
        {
            int i;
            for(i=1;i<=5;i++)
            {
                   if(i==3)
                   {
                          printf(“Loop Terminated…”);

                          /* Break statement terminating third iteration of loop */
                          break;
                   }
                   printf(“%dn”,i);
            }

        ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसे ही loop की तीसरी iteration आती है break statement execute होता है और loop terminate हो जाता है। यह उदाहरण निचे दिया गया output generate करता है।

        1
        2
        Loop Terminated… 

        continue Statement 

        C language में continue statement loop की किसी iteration को skip करने के लिए प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए आप चाहते है की loop की तीसरी iteration execute ना हो तो उसके लिए आप condition द्वारा third iteration detect करके continue statement द्वारा उसे skip कर सकते है।

        C continue statement का general syntax निचे दिया जा रहा है। 

        continue;

        निचे continue statement का एक simple उदाहरण दिया जा रहा है।

        #include<stdio.h>

        void main()
        {
            int i;
            for(i=1;i<=5;i++)
            {
                  if(i==3)
                  {
                        printf(“Third iteration skipped…n”);

                        /* Skipping third loop iteration using continue statement */
                        continue;
                  }
                  printf(“%dn”,i);
            }
        }

        ऊपर दिया गया उदाहरण निचे दिया गया output generate करता है।

        1
        2
        Third iteration skipped…
        4
        5

        goto Statement 

        C language में goto statement program के अंदर एक जगह से दूसरी जगह jump करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह jump define किये गए label पर किया जाता है। 
        C goto statement का general syntax निचे दिया जा रहा है। 


        goto label-name;


        label-name:

        … 
        जैसा की आप ऊपर दिए गए syntax में देख सकते है label को define करने के लिए label का नाम लिखकर colon (:) लगाया जाता है। Label पर jump करने के लिए goto statement के बाद label का नाम लिखा जाता है।

        निचे goto statement को एक simple उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है।

        #include<stdio.h>

        void main()
        {
            printf(“I don’t want to print Hello. Jumping…n”);

            /* Going to hi label */
            goto hi;
            printf(“Hellon”);

            /* label from where execution will start */
            hi:
            printf(“Hin”);
        }

        ऊपर दिया गया उदाहरण निचे दिया गया output generate करता है।

        I don’t want to print Hello. Jumping…
        Hi
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