Linux in Hindi : Linux and Windows

  • Introduction to linux and windows in Hindi
  • Differences between linux and windows in Hindi
  • Similarities between linux and windows in Hindi

Introduction to Linux and Windows

यदि personal computers की बात की जाय तो Microsoft Windows सबसे popular operating system है। यह पूरी दुनिया में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला operating system है। Programmers से लेकर आम जनता तक सभी इस operating system का प्रयोग करते है।

ज्यादातर ऐसे students जो linux को सिखने का प्रयास करते है वे घर या collage कँही ना कँही पर Windows अवश्य प्रयोग करते होंगे और हो सकता है की उन्हें linux थोड़ा अटपटा लगे। इसलिए linux के बारे में सीखते समय यह आवश्यक है की आपको Windows और linux के बीच की समानता और असमानता के बारे में पता हो, ताकि आप linux का बेहतर उपयोग कर सके।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए यँहा linux और windows के बीच समानता और असमानता बताई जा रही है।

Differences Between Linux and Windows

निचे Windows और Linux operating system के बीच पायी जाने वाली असमानताएँ बताई जा रही है।

Costing

Linux एक free of cost operating system है। जबकि windows एक commercial software है। यही नहीं linux पर use होने वाले software programs भी free of costs ही होते है।

Open Source

Linux एक open source operating system है। इसका code download करने के लिए free of cost available है। कोई भी इसके development में योगदान कर सकता है। जैसा की मैने पहले कहा Windows एक commercial operating system है। इसका code सिर्फ Microsoft के pass available है।

कोई भी दूसरा programmer या community इसके development में योगदान नहीं कर सकते है। हालाँकि windows पर कोई भी open source या commercial software उपयोग किया जा सकता है।

Customization

Linux एक customizable operating system है। यानी की कोई भी person या community इसमें बदलाव करके खुद उपयोग के हिसाब से इसे उपयोग कर सकती है। Windows operating system में किसी भी प्रकार का बदलाव सिर्फ Microsoft ही कर सकती है।

Security

Linux एक बहुत ही secure operating system है। इसमें किसी प्रकार virus या malware attack का भी अधिक खतरा नहीं रहता है। जबकि Windows एक vulnerable operating system है, जिसमे virus और malware आदि attacks का अधिक खतरा रहता है।

Kernel

Linux operating system में monolithic kernel होता है। एक monolithic kernel एक single process के रूप में कार्य करता है, जिसमें सभी कार्य directly उसी process द्वारा perform किये जाते है। जबकि Windows operating system microkernel होता है जो separate processes के रूप में divided होता है जो अलग अलग tasks perform करने के लिए responsible होती है।

Slash

Linux में किसी भी directory आदि का path forward slash ()/ द्वारा define किया जाता है। जबकि Windows में ये black slash () द्वारा define किया जाता है।

File Names

Linux में file names case sensitive होते है। यानी की linux में age और AGE दोनों समान माने जाते है। जबकि Windows में file names case insensitive होते है। यानी की age और AGE दोनों अलग अलग नाम माने जाते है।

File Structure

Windows में जँहा disk को अलग अलग drives में बाँटा जाता है, वँही linux में सब कुछ एक tree structure में store किया जाता है। इसी tree में drives mount की जाती है और उनमें data store किया जाता है। Linux में files को tree structure में organize किया जाता है।

Similarities Between Linux and Windows

Differences के अलावा linux और windows operating systems के बीच कुछ similarities भी पायी जाती है। इनके बारे में आगे बताया जा रहा है।

User Accounts

Linux और windows दोनों ही operating system आपको multiple user accounts द्वारा operating system को use करने की ability provide करते है। आप एक से अधिक accounts द्वारा login कर सकते है। हर account का data separate store किया जाता है। Administrator account सभी accounts का data देख पाता है।

Development Tools

Linux और windows दोनों ही software development की ability के साथ आते है। आप windows और linux कोई सा भी operating system इस्तेमाल करके software development कर सकते है।

Hardware Support

Linux और windows दोनों ही बहुत से hardwares को बिना किसी additional program आदि के support करते है।

Web Services

Linux और windows दोनों में ही basic web services जैसे की email, web surfing, database आदि available होती है।

Automated Tasks

Linux और windows दोनों में ही tasks को automate करने के लिए programs available है। Linux में यह कार्य Cron द्वारा और windows में Task Scheduler द्वारा किया जाता है।

Update

Linux और windows दोनों ही operating system समय समय पर update किये जाते है।

Virus

Linux और windows दोनों ही operating system में virus आ सकते है। लेकिन फिर भी linux operating system windows से अधिक secure होता है।

Can Run on Same Hardware Simultaneously

Linux और windows दोनों को एक ही hardware पर install  करके use किया जा सकता है। हालाँकि एक बार में एक ही operating system उपयोग किया जा सकता है।

Linux in Hindi : Distributions

  • Introduction to linux distributions in Hindi
  • Different linux distributions in Hindi

Introduction to Linux Distributions 

Linux एक open source operating system है। इसका code download के लिए freely available है। कोई भी उस code को download करके उसे अपनी आवश्यकतानुसार उपयोग कर सकता है।

Open source होने के अलावा linux customizable भी है। यानी की linux को कोई भी download करके अपने उपयोग के मुताबिक़ उसमे बदलाव कर सकता है।

कई अलग अलग communities ने linux को आवश्यकतानुसार customize करके launch किया है। यही कारण है की market में linux के इतने सारे variations available है। इन variations को linux distributions कहा जाता है।

हालाँकि linux के सैकड़ों की सँख्या में variations available है लेकिन फिर भी इन सब में core linux operating system (kernel) same ही होता है। Linux kernel में किसी प्रकार के बदलाव नहीं किये जाते है।

अलग अलग tasks को ध्यान में रखते हुए कई communities ने linux के अलग अलग distributions create किये है। आपको यह जानकार हैरानी होगी की Android operating system के भी core में linux ही कार्य कर रहा है।

Linux के कुछ popular distributions के बारे में आगे बताया जा रहा है।

Redhat Enterprise

यह linux distribution Red Hat organization द्वारा design किया गया है। इसे commercial purpose के लिए develop किया गया था। इसे RHEL के नाम से भी जाना जाता है। यह distribution desktop और server दो versions में release किया जाता है। इस distribution के servers में ARM64 और IBMZ आदि available है। 

Ubuntu

Ubuntu एक Debian based free और open source linux distribution है। Microsoft Windows और Apple Mac के बाद यह तीसरा सबसे popular operating system है। यह distribution desktop, server और cloud तीन versions में available है। Ubuntu 18.10 latest ubuntu version है। 

Fedora 

यह linux distribution community द्वारा support किये गए fedora project द्वारा बनाया गया है। इसे Red Hat enterprise द्वारा support किया गया है।

इस linux distribution में industry leading free और open source software programs available है। यह distribution भी काफी popular है। 

Debian 

Debian एक UNIX like operating system है। यह पूरी तरह free software packages के द्वारा nirmit है। यह project 1993 में lan murdock के द्वारा शुरू किया गया था।

Debian की stable release personal computers और network servers के लिए बहुत popular है। कई दूसरे distributions इस distribution के आधार पर बनाये गए है।

Linux Mint

Linux mint एक community द्वारा support किया गया linux distribution है। इसे Ubuntu और Debian के आधार पर बनाया गया है। यह एक आसानी से उपयोग किये जाने वाला operating system है।

यह distribution कुछ proprietary softwares के द्वारा multimedia के लिए पूरा support provide करता है। इसके अलावा इसमें कुछ free और open source programs भी include किये गए है।

Arch 

Arch linux X86-64 architecture पर based computers के लिए बनाया गया एक linux distribution है। यह free और open source software programs के combination से बना हुआ है। इसकी community में शामिल होकर कोई भी इसके लिए योगदान दे सकता है। 

Arch linux rolling release model पर कार्य है। इस model में updates चलती ही रहती है जो की system को continuous basis पर improve करती है। Arch linux developers के बीच काफी प्रसिद्ध है। 

CentOS

CentOS (Community Enterprise Operating System) एक free enterprise class linux operating system है। Enterprise class होने के अलावा यह community supported भी है। यह Red Hat Enterprise linux के साथ compatible है।

Gentoo

Gentoo linux एक ऐसा linux distribution है जिसे portage package management system द्वारा बनाया गया है। यह binary distribution की तरह ना होकर इसका source code user की सहूलियत के आधार पर locally compile किया जाता है। 

Speed और machine specific optimization ही gentoo linux के features है। 

OpenSUSE

यह linux SUSE linux GmbH और दूसरी companies द्वारा मिलकर develop किया गया है। इसे बनाने का उद्देश्य software developers और system administrator को एक open source tools का set provide करना था। इसके अलावा इस distribution में आपको एक user friendly desktop और multiple features वाला server environment प्राप्त होता है।

Slackware

यह distribution Patrick Volkerding द्वारा 1993 में create किया गया था। यह distribution Softlanding Linux System पर आधारित है। इस distribution के आधार पर कई दूसरे linux distributions create किये गए है। उदाहरण के लिए SUSE linux distribution slackware के आधार पर ही बनाया गया है। 

Linux in Hindi : Architecture

  • Introduction to linux architecture in Hindi
  • Linux kernel in Hindi
  • Linux system libraries in Hindi

Introduction to Linux Architecture

Linux एक open source, unix based operating system है। Linux operating system का architecture Unix operating system के आधार पर बनाया गया है।

Linux architecture कई components से मिलकर बना हुआ है। ये सभी components एक साथ मिलकर operating system कहलाते है।

Linux architecture में hardware को यदि operating system का हिस्सा न माने तो बाकी सभी components software होते है। सभी components अपने level पर अलग अलग tasks perform करने के लिए responsible होते है।

दूसरे level के कार्य के लिए ये components एक दूसरे से सम्पर्क भी करते है और एक साथ मिलकर कार्य करते है।

Linux architecture का एक सरल प्रारूप निचे प्रस्तुत किया गया है। इसमें hardware level से लेकर end user level तक के सभी components जो linux operating को बनाते है उनको दर्शाया गया है।

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Linux architecture के components के बारे में detail से आगे बताया जा रहा है।

Hardware

Linux architecture में सबसे lowest level पर hardware होता है। असल में hardware operating system का part नहीं होता है। Operating system और hardware अलग अलग होते है। Hardware द्वारा विभिन्न tasks perform करने के लिए ही operating system create किया जाता है।

Hardware में विभिन्न hardware devices होते है। जैसे की RAM, CPU, Input/Output devices आदि hardware होते है। इन सभी hardware devices से interact करने के लिए operating system में अलग अलग programs होते है। उदाहरण के लिए disk organizer program का कार्य disk को organize करना होता है।

Hardware level से directly operating system का kernel program connected रहता है।

Kernel

Kernel core operating system होता है। हालाँकि दूसरे components भी operating system का ही हिस्सा होते है। लेकिन सही मायनों में kernel ही असल operating system होता है। 
Kernel program ही hardware और दूसरे programs के बीच connection establish करता है। इस program की जिम्मेदारी hardware resources को manage करना होती है।

इसके अलावा device management, memory management, process management और system calls को handle करना जैसे कार्य भी इसी program द्वारा किये जाते है। 

Shell

Shell एक utility होती है जो user requests को process करती है। Command को read और process करना ही shell program की जिम्मेदारी होती है।

Shell program kernel से directly connected होता है। आपके द्वारा दी गयी command shell kernel को भेजता है जिसके आधार पर kernel resources का उपयोग allow करता है। 

System Libraries

System libraries वे programs होते है जो system को कार्यान्वित रखने के लिए आवश्यक होते है। System libraries के द्वारा ही kernel द्वारा कोई task perform करवाया जाता है। कोई भी task kernel खुद नहीं perform करता है बल्कि system libraries द्वारा system calls generate किये जाते है जिनके response में kernel वह task perform करता है।

Operating system की basic functioning के लिए system libraries ही responsible होती है। System libraries के बिना operating system कार्य नहीं कर सकता है। 

System Utilities

System utilities कुछ programs का set होता है। इन utilities का प्रयोग system के रखाव के लिए user द्वारा किया जा सकता है। जैसे की disk cleaner, device manager और disk optimizer आदि system tools ज्यादातर सभी operating systems में होते है।

Development Tools

Developement tools वे tools होते है जो जरुरत पड़ने पर operating system में बदलाव करने में सक्ष्म होते है। ये tools operating system को update और किसी error आदि के case में troubleshoot करने के लिए प्रयोग किये जाते है।

End User Tools

End user tools वे tools होते है जो user द्वारा primarily use किये जाते है। जैसे की browser, music player आदि end user tools होते है। 

Linux in Hindi : Introduction

  • Introduction to linux operating system in Hindi
  • History of linux operating system in Hindi
  • Features of linux operating system in Hindi

Introduction to Linux Operating System

Linux एक operating system है। जैसे की Windows, Macintosh और Android आदि operating systems है उसी प्रकार linux भी एक OS है।

Operating system एक software program होता है। यह कई software programs से मिलकर बना होता है। Operating system सभी कार्य hardware की मदद से करता है। एक operating system hardware और software के बीच communication establish करता है।

Operating system user द्वारा दी गयी commands को identify करके hardware की मदद से उसे implement करता है। इसके अलावा operating system hardware resources को manage करना, user की files को save करना आदि कार्य भी करता है।

Linux एक core operating system है। Linux में लगभग सभी कार्य commands द्वारा किये जाते है। Linux आपको बहुत अधिक graphical user interface नहीं provide करता है। 

जितने भी popular operating systems है जैसे की Windows और Mac आदि उन्हें user friendly बनाने के लिए उनको graphical user interface (GUI) द्वारा ढक दिया गया है। हालाँकि core level पर वे सभी linux की तरह ही कार्य करते है। 

Linux के साथ कार्य करके आप जानेंगे की असल में एक operating system कैसे कार्य करता है। क्योंकि दूसरे popular operating systems में सभी कार्य GUI elements द्वारा perform किये जाते है।

इसलिए user को पता नहीं रहता है की असल में हर GUI element (जैसे की button आदि) एक command के रूप में execute किया जा रहा है। 

Linux में आप किसी graphical user interface से अधिक ना interact करके direct operating system के मुख्य program kernel से interact करते है।  

Unix और linux में काफी समानता पायी जाती है। ऐसा माना जाता है की यदि आप इन दोनों में से कोई भी एक सिख लेते है तो दूसरा भी आप आसानी से उपयोग कर सकते है। Linux को unix standards के अनुरूप design किया गया है। 

History of Linux Operating System

Linux operating system Linus Torvalds द्वारा design किया गया था। वे एक computer science student थे और प्रतिभा के धनी थे।

Linus Torvalds Unix operating system पर कार्य करते थे तभी उन्हें लगा की Unix में कुछ improvements की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात को Unix designer के समक्ष रखा। Unix designers को changes standards के अनुरूप नहीं लगे तो उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

इसके बाद Linus ने सोचा की एक operating system create किया जा सकता है जो उनके द्वारा suggest किये गए changes के अनुरूप हो।

इसके बाद Linus ने Unix operating system के आधार पर ही 1991 एक kernel तैयार किया जिसे उन्होंने Linux नाम दिया। यह kernel Linus द्वारा suggest किये गए changes के अनुरूप था।

इसके बाद उन्होंने कई और programmers के साथ मिलकर कुछ programs develop किये जो Linux को कार्यन्वित करने के लिए आवश्यक थे। इस कार्य में उन्हें थोड़ा समय लगा। वर्ष 1991 से 1992 के आसपास तक Linux का एक working model market में launch कर दिया गया था।

Linux एक commercial OS ना होकर के open source था। यही कारण रहा की Linux कम समय में बहुत अधिक पॉपुलर हो गया। आज Linux के कई distributions market में available है।

Features of Linux Operating System

Linux operating system कुछ ऐसे महत्वपूर्ण features के साथ आता है जो इसे दूसरे operating systems से unique बनाते है। इन features के बारे में निचे बताया जा रहा है।

Linux is Portable 

Linux एक portable operating system है। यानी linux कई अलग अलग hardware platforms पर एक ही प्रकार से कार्य करता है। कुछ operating systems निश्चित hardware के साथ ही कार्य करते है इसलिए वे limited होते है। लेकिन linux को सभी प्रकार के hardware platforms पर use किया जा सकता है। 

Linux is Open Source

Linux एक open source operating system है। Linux का code freely download के लिए available है। कई communities और independent programmers एक साथ कार्य करके linux के development में योगदान देते है।

Linux is Multi-User Operating System

Linux सही मायनों में एक multi-user operating system है। एक साथ कई users एक ही operating system पर कार्य कर सकते है और resources जैसे की memory और disk space आदि को share कर सकते है। 

Linux is Multiprogramming Operating System 

आजकल के ज्यादातर सभी पॉपुलर operating systems की तरह linux भी एक multiprogramming operating system है। Linux में एक साथ कई applications कार्य कर सकती है। 

Linux is More Secure

Linux किसी भी दूसरे operating system से अधिक secure है। Network security से लेकर user authentication और file encryption तक सभी तरह के security features linux में available है।

Linux Have Hierarchical File System

Linux में files को hierarchical order में organize किया जाता है। इससे files को access करना और उनके साथ किसी भी तरह के operation perform करना और भी आसान और fast हो जाता है। यह programmers के लिए कई प्रकार से फायदेमंद होता है।

Linux Have Shell

Linux में Shell available है। Shell एक software program होता है। Shell के द्वारा आप operating system से interact कर सकते है। इसके लिए commands का प्रयोग किया जाता है। Shell के द्वारा आप operating system से कई प्रकार के कार्य करवा सकते है। जैसे की application programs को open करना और दूसरे operations आदि। 

Python Tutorial in Hindi

Python Tutorial in Hindi

Python एक beginner friendly general purpose programming language है। हालाँकि python को बहुत सी programming languages के बाद create किया गया है। लेकिन फिर भी यदि programming सिखने की बात की जाय तो python सबसे अच्छी साबित होती है।

इसका मुख्य कारण है की python बहुत ही reable और simple है। इसमें सभी tasks common english words से बनी हुई commands के द्वारा perform किये जाते है। English words का इसमें इतना सटीक उपयोग किया गया है की programmer आसानी से program को लिख भी पाता है और समझ भी जाता है।

Python कई complex functionalities को भी बड़ी आसानी से implement करने की ability programmers को provide करती है। Python का प्रयोग सिर्फ सिखने तक ही नहीं है। यह एक तेजी से बढ़ती हुई programming language है। इसने market में अपनी reputation बना ली है जिसके कारण आज कई companies तो python projects ही कर रही है।

Python को सिख कर आप दूसरी programming languages भी सिख सकते है और एक programmer के रूप में भी कार्य कर सकते है। यदि आप एक python programmer बनने की सोच रहे है तो इससे अधिक बेहतर समय नहीं हो सकता है।

Python की खूबियों और popularity को ध्यान में रखते हुए Best Hindi Tutorials आपको python tutorials की आसानी से समझ आने योग्य Hindi भाषा में लिखी गयी tutorial series provide कर रही है। इस series की सभी tutorials में हर concept को आसान भाषा में उदाहरण सहित समझाया गया है।

Table of Contents 

  1. Python Introduction : Python कई important features provide करती है। इस tutorial में आप ऐसे ही कुछ python features के बारे जानेंगे। इसके अलावा आप यह जानेंगे की python को कँहा उपयोग किया जा सकता है। 
  2. Python Installation : Python में programming करने के लिए python interpreter का होना आवश्यक है। इस tutorial में आप python interpreter को install करना और programming के लिए ready करना सीखेंगे। 
  3. Python Interpreter : Python interpreter एक program है जो python commands को समझ कर उन्हें execute करता है। इस tutorial में आप python interpreter और उसके different modes के बारे में detail से जानेंगे। 
  4. Python Syntax : Python का syntax दूसरी programming languages से different है। इसमें indentations का बहुत महत्व होता है। इस tutorial में आप python indentations और python में comment करने के बारे में जानेंगे। 
  5. Python First Program : इस tutorial में आप अपना पहला python program create करना और उसे execute करना सीखेंगे। यह एक simplest program होता है। 
  6. Python Variables : Variables का प्रयोग data को store करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप python में variables declare करना और उनके scopes के बारे में जानेंगे।  
  7. Python Numbers : Python में Number types का प्रयोग number variables create करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में python Number types के बारे में जानेंगे और उन्हें उपयोग करना भी सीखेंगे। 
  8. Python Strings : String types का प्रयोग string variables create करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप python में strings create करना और string operators और methods को use करना सीखेंगे। 
  9. Python Lists :  Lists एक items का ordered collection होता है। इस tutorial में आप python में list create करना और उसके साथ operations perform करना सीखेंगे। 
  10. Python Tuples : Tuples data items के ordered और unchangeable collections होते है। इस tutorial में आप python में tuples create करना और उसके methods को use करना सीखेंगे।  
  11. Python Dictionaries :  Dictionaries items का एक unordered collection होती है। इस tutorial में आप python dictionaries create करना और उन्हें access करना सीखेंगे। 
  12. Python Modules : Modules का प्रयोग कई python files को store करने के लिए किया जाता है। इस tutorial के बारे में आप standard modules और उन्हें उपयोग करने के तरीकों के बारे में सीखेंगे। 
  13. Python Packages :  Packages का प्रयोग अलग अलग modules को organize करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप python packages को create और import करना सीखेंगे। 
  14. Python Functions : Functions का प्रयोग कुछ specific commands को program में कई जगह पर execute करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप python functions, local symbol table और python function arguments के बारे में जानेंगे। 
  15. Python Loops : Loop का प्रयोग एक ही code को बार बार execute करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप python loops और python loop control variables के बारे में जानेंगे। 
  16. Python Decision Making : Decision making statements का प्रयोग condition के अनुसार statements को execute करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप अलग अलग python statements के बारे में जानेंगे। 
  17. Python Classes & Objects : Classes object oriented programming की सबसे महत्वपूर्ण functionality होती है। इस tutorial में आप python में classes create करना और उनके objects create करना सीखेंगे। 
  18. Python Date & Time : Python आपको date और time सम्बंधित जानकारी provide करने की ability provide करती है। इस tutorial में आप python में available date और time functions और उनके उपयोग के बारे में जानेंगे। 
  19. Python Errors & Exceptions : Errors और exceptions किसी program के execution को रोक देती है। इस tutorial में आप python में errors और exceptions को handle करना सीखेंगे। 
  20. Python Lambda Functions : Lambda functions बिना नाम के functions होते है। इस tutorial में आप lambda functions create करना सीखेंगे। 
  21. Python File Handling : ज्यादातर सभी programming languages file handling की ability provide करती है। इस tutorial में आप python के file handling mechanism के बारे में जानेंगे। 
  22. Python Iterators : Iterators का प्रयोग objects को iterate करने के लिए किया जाता है। इस tutorial में आप iterators implement करना और उन्हें उपयोग करना सीखेंगे। 
आशा है की Python tutorials की Hindi भाषा में provide की गयी यह series आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। 

MongoDB in Hindi : Introduction

  • Introduction to MongoDB in Hindi
  • Features of MongoDB in Hindi
  • Difference between RDBMS and MongoDB in Hindi

Introduction to MongoDB

आज कल सभी बड़ी organizations में big data को store, process और analyse करने की आवश्यकता होती है। Big data की size बहुत अधिक होती है और यह unstructured form में होता है।

इसलिए traditional storage systems (relational databases) द्वारा इसे handle नहीं किया जा सकता है।

Traditional storage systems द्वारा big data को नहीं handle किये जाने के कारण कुछ नए प्रकार के data storage systems का invention हुआ है। इन्हे NoSQL databases कहा जाता है।

NoSQL databases ऐसे databases होते है जो data को store और manage करने के लिए relational model (table and row format) का प्रयोग नहीं करते है। साथ ही इन databases में operations (insert, update, delete आदि) perform करने के लिए SQL (Structured Query Language) का भी प्रयोग नहीं किया जाता है।

सभी NoSQL databases एक जैसे नहीं होते है। NoSQL databases अलग अलग models के आधार पर 4 categories के होते है।

  • Document Oriented
  • Graph Oriented
  • Key Value Oriented
  • Wide Column Oriented

NoSQL databases में सबसे अग्रणी MongoDB है। MongoDB एक open source document oriented NoSQL database है।

MongoDB में कोई भी record एक document होता है। MongoDB document असल में एक data structure होता है जो की field और value के pair से बना होता है। इसे आप C language में struct की तरह ही समझ सकते है।

MongoDB documents JSON objects की तरह होते है। MongoDB document के fields की values के रूप में दूसरे documents और arrays pass किये जा सकते है।

MongoDB के document oriented होने की कई advantages है। इनमें से कुछ निचे दी जा रही है।

  • सभी popular modern programming languages documents को objects के रूप में treat करती है। इससे उन languages द्वारा MongoDB documents को handle करना बहुत आसान होता है। 
  • एक MongoDB document में आप दूसरे documents को embed कर सकते है इससे MongoDB में joins perform करने की आवश्यकता नहीं होती है। 
  • MongoDB में dynamic schemas होते है जिनसे polymorphism बहुत तेजी से perform किया जाता है। 

ऊपर दी गयी advantages के अलावा MongoDB में SQL की तरह दो operations perform करने के लिए अलग अलग queries fire करने की आवश्यकता नहीं होती है। MongoDB में एक साथ कई operations execute किये जा सकते है।

MongoDB को C++ में लिखा गया है। इसके drivers और libraries को उनकी ही languages में लिखा गया है। उदाहरण के लिए Java द्वारा MongoDB को handle करने के लिए driver Java में ही लिखा गया है। लेकिन better performance के लिए कुछ drivers को C में लिखा गया है।

MongoDB cross platform है। इसे Windows, Linux, OS X और Solaris आदि के साथ use किया जा सकता है।

MongoDB collection और document के concept पर कार्य करता है और यह high performance, high availability और easy scalability provide करता है।

MongoDB का प्रयोग मुख्यतः high volume data storage के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसे ऐसी applications के लिए data store करने के लिए use किया जाता है जिनमें high performance की आवश्यकता होती है।

MongoDB का development October 2007 में 10gen company के Eliot Horowitz और Dwight Merriman द्वारा शुरू किया गया था। इसकी first public release February 2009 में की गयी थी।

Adobe, Linked In और eBay जैसी बड़ी websites MongoDB को use करती है।

Features of MongoDB

MongoDB database के कुछ features निचे दिए जा रहे है। MongoDB की popularity में इन features का अहम् योगदान है।

High Performance

MongoDB अपनी high performance और data persistence के लिए जाना जाता है। MongoDB अत्यधिक load के दौरान भी data persistent रखता है। 

Data models को embed किये जाने की ability की वजह से MongoDB में I/O activity कम हो जाती है। इसके अलावा MongoDB में indexes faster queries perform करती है। 

Rich Query Language

MongoDB SQL को support नहीं करती है। Read/Write operations के लिए यह स्वयं की rich ad hoc query language use करती है। इस language द्वारा एक साथ कई operations execute किये जा सकते है। यह language SQL से fast होती है।

High Availability 

MongoDB आपको replication की facility provide करता है। इस facility को replica set कहा जाता है। Replica set असल में कई MongoDB servers का set होता है। ये server same data set को maintain करते है।

Replication facility के द्वारा system failure होने पर data automatically recover कर लिया जाता है। साथ ही यह facility data redundancy भी maintain करती है।

Horizontal Scalability

MongoDB horizontal scalability feature provide करती है। यह feature MongoDB में core functionality के रूप में add किया गया है। 

MongoDB में यदि load बढ़ता है तो उसमे और nodes (systems) को आसानी से जोड़ा जा सकता है और performance को maintain किया जा सकता है। इसे shredding कहा जाता है। जिसमे machines के clusters के बीच data को distribute कर दिया जाता है। 

Support for Multiple Storage Engines

MongoDB कई storage engines को support करता है। उनमें से कुछ के बारे में निचे बताया जा रहा है। 

  • WiredTiger Storage Engine
  • In-Memory Storage Engine
  • MMAPv1 Storage Engine

इसके अलावा MongoDB द्वारा pluggable storage engine API भी provide किया जाता है। 

Difference Between RDBMS and MongoDB

RDBMS और MongoDB के बीच पाए जाने वाले कुछ major differences के बारे में निचे बताया जा रहा है।

Table | Collection 

RDBMS में एक table की rows और columns होती है जिनमें data store किया जाता है। MongoDB में same structure को collection कहा जाता है। एक collection documents का group होता है। 

Row | Document 

जिस प्रकार RDBMS में rows में data store किया जाता है उसी प्रकार MongoDB में documents में data store किया जाता है। एक MongoDB document key value pairs का set होता है। 

Column | Field 

RDBMS में column किसी particular set की data values को बताते है। MongoDB में यही कार्य fields द्वारा किया जाता है। 

Joins | Embedded Documents 

RDBMS में दो tables से एक साथ data extract करने के लिए उन्हें join किया जाता है। MongoDB में यह कार्य documents को embedded करके किया जाता है। 

Primary Key | Default Key 

RDBMS में data को uniquely identify करने के लिए user द्वारा primary key create की जाती है। MongoDB यह कार्य स्वयं ही एक default key generate करके करता है। 

Data Integrity 

RDBMS में data integrity force की जाती है लेकिन MongoDB में इसकी आवश्यकता नहीं होती है। 

Normalization 

RDBMS में duplicate data को रोकने के लिए normalization की आवश्यकता होती है लेकिन MongoDB में इसकी भी आवश्यकता नहीं होती है। 

What is Big Data? and How it Benefits?

बीते कुछ वर्षों में humans द्वारा generate किये जाने वाले data में वृद्धि हुई है। यह data अलग अलग technologies जैसे की Facebook, twitter, WhatsApp और YouTube आदि के माध्यम से generate हो रहा है।

एक study के अनुसार आज humans हर रोज़ लगभग 2.5 Quintilian bytes का data produce करते है। यह data अलग अलग formats जैसे की text, image और video आदि में generate होता है।

Facebook posts से लेकर YouTube videos और emails तक humans द्वारा generate किये जाने वाले data में हर दिन वृद्धि होती ही जा रही है। यह data इतना अधिक है की traditional data storage और processing systems द्वारा इसे manage करना possible नहीं है।

ऐसा data जिसे traditional data storage और processing systems (Databases आदि) द्वारा manage नहीं किया जा सकता है Big Data कहलाता है। Big Data की situation कई organisations और governments द्वारा face की जाती है।

हालाँकि Big Data की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है लेकिन Big data को generally Doug Laney द्वारा दी गयी 3 V’s की परिभाषा से परिभाषित किया जाता है।

Big-data-in-Hindi

Big Data की 3 V’s (Volume, Velocity & Variety) की परिभाषा को यदि सरल शब्दों में कहा जाये तो अत्यधिक data, बहुत तेजी से और अलग अलग formats में जब generate होता है तो वह Big Data कहा जाता है।

ऐसा नहीं है की humans द्वारा generate किया जाने वाला यह Big Data महत्वपूर्ण नहीं है। यह data बहुत महत्वपूर्ण है और इसे organisations और nations के improvement के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए 2016 की एक report के अनुसार Facebook पर हर minute 2.5 million से लेकर 3 million तक posts share की जाती है। इस data के आधार पर पता लगाया जा सकता है की लोग किस विषय में अधिक बात कर रहे है और वे किस product या service को अधिक पसंद कर रहे है।

Big Data का evaluation कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ उजागर कर सकता है जो की traditional systems के द्वारा possible नहीं है। Big Data को evaluate करके नए trends और किसी product या service के प्रति लोगों के behaviour आदि को जाना जा सकता है।

Big Data को analyse करके users को relevant ads show किये जा सकते है जिन पर user द्वारा click किये जाने की संभावना अधिक होती है। साथ ही Big Data का प्रयोग users के experience को improve करने के लिए भी किया जा सकता है।

लेकिन Big Data को evaluate करने के लिए नयी technologies और skills की आवश्यकता होती है। इसके लिए ऐसी technology और workers की आवश्यकता होती है जो Big Data से important facts और results extract कर सके।

Apache Hadoop एक ऐसी ही technology है। यह Big Data के साथ सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला software program है। Apache के अनुसार यह एक framework है जिसके द्वारा बहुत सारे computers के groups में available Big Data की distributed processing की जा सकती है।

Apache-Hadoop-in-Hindi

Apache Hadoop open source है और यह Big Data के storage और processing के लिए simple programming model का प्रयोग करता है।

Benefits of Big Data Analysis

Big Data को analyse करने के कुछ benefits निचे दिए जा रहे है। 

  • Big Data analytics के आधार पर organisations trends और customer behaviour को पहचान सकती है और उसी के अनुरूप अपने product को बनाकर अधिक sales generate कर सकती है।  
  • Big Data के आधार पर एक organisation अपने product या service के प्रति users के behaviour को पहचान सकती है और उसे improve कर सकती है। 
  • Big Data analysis के आधार पर product और services की cost को कम किया जा सकता है। 
  • Big Data analysis के माध्यम से customers को उनकी पसंद के अनुसार products के ads दिखाए जा सकते है जिससे वे उन्हें अधिक से अधिक खरीदें। 

Big Data कितना महत्वपूर्ण यह अभी हम देखने ही लगे है जैसे जैसे यह पूरी तरह implement होगा तो orgaisations और उनके behaviour में कई बड़े changes देखने को मिलेंगे। 

5 Hindi Books You Must Read As A Student

5 Hindi Books You Must Read As A Student

ज्ञान ही शक्ति है। ज्ञान मनुष्य की तीसरी आँख होती है। बिना ज्ञान के व्यक्ति अँधा होता है। पर्याप्त ज्ञान द्वारा व्यक्ति स्वयं के जीवन को दिशा दे पाता है। वँही ज्ञान के अभाव में व्यक्ति नष्ट हो जाता है।

जब आपके पास किसी क्षेत्र से सम्बंधित पर्याप्त ज्ञान होता है तो आपका आत्मविश्वास अत्यधिक बढ़ा हुआ रहता है। आप उस क्षेत्र में कार्य करने के लिए उत्साहित रहते है। किसी भी क्षेत्र में आपके ज्ञान का स्तर ही आपके आत्मविश्वास के स्तर को निर्धारित करता है।

एक तरफ जँहा ज्ञान आत्मविश्वास को बढ़ाता है वँही दूसरी तरफ अज्ञान व्यक्ति के भीतर डर पैदा करता है। जब आपके पास किसी क्षेत्र से सम्बंधित पर्याप्त ज्ञान नहीं होता है तो आपके मन में उस क्षेत्र के प्रति कोई उत्साह भी नहीं होता है। ऐसे में उस क्षेत्र में पर्याप्त सफलता नहीं प्राप्त की जा सकती है।

सभी जानते है की एक बेहतर जीवन के निर्माण के लिए छात्र जीवन में बेहतर ज्ञान प्राप्त किया जाना चाहिए। यही कारण होता है की माता पिता अपनी संतान को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने के लिए भेजते है। यँहा तक की कई बार तो स्वयं कष्ट झेल कर भी संतान को शिक्षा प्रदान करते है।

माता पिता ऐसा इसलिए करते है क्योंकि वे छात्र जीवन में प्राप्त किये जाने वाले ज्ञान के महत्व को समझ चुके होते है। वे चाहते है की उनकी संतान बेहतर से बेहतर ज्ञान प्राप्त करें ताकि वह किसी पर निर्भर न रहे और उच्च जीवन का आनंद ले सकें। लेकिन क्या हर छात्र ऐसा कर पाता है?

छात्र जीवन में कई प्रकार की परेशानियाँ झेलनी पढ़ती है। माता पिता की अपेक्षाएँ, पढ़ने में उत्साह की कमी, बाहरी दुनियाँ की चकाचौंध के प्रति आकर्षण, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण, बेहतर marks प्राप्त करने का दबाव और शिक्षा की प्राप्ति और उपयोग से सम्बंधित ज्ञान का अभाव ऐसे कुचक्र का निर्माण करते है जिससे कई छात्र अपने को मुक्त नहीं कर पाते है।

ज्यादातर छात्र यह समझ ही नहीं पाते की वे शिक्षण संस्थान में क्यों है और जो ज्ञान वे प्राप्त कर रहे है उसका महत्व क्या है। वे सही और गलत का निर्णय नहीं ले पाते है और सही दिशा से भटक जाते है।

ऐसे में छात्रों को ऐसे ज्ञान की आवश्यकता होती है जो उन्हें दिशा भटकने से रोके और सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। ऐसे कई लेखक हुए है जिन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर पुस्तकें लिखी है। ये पुस्तकें विशेष रूप से छात्रों के लिए ही लिखी गयी है। मेरा यह सुझाव है की अपने syllabus की पुस्तकों के अलावा प्रत्येक छात्र को इन पुस्तकों को भी अवश्य पढ़ना चाहिए।

निचे ऐसी ही कुछ पुस्तकों के बारे में बताया जा रहा है जो मैने स्वयं पढ़ी है। ये पुस्तकें आपको छात्र जीवन में अधिकतम ज्ञान और सफलता प्राप्त करने के उपयोगी तरीके बताती है।

ये पुस्तकें आपको स्वयं को भटकने से बचाने और कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देती है। आपको इन पुस्तकों से छात्र जीवन से सम्बंधित ज्ञान प्राप्त करना चाहिए ताकि आप यह समझ सकें की इस समय आपके लिए क्या गलत है और क्या सही है। ये पुस्तकें आपको अंतर्ज्ञान प्रदान करती जिससे आप उस कार्य का चुनाव कर पाते है जो आपके लिए सही है।

मै स्वयं भी इन पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान के आधार पर आपके लिए articles लिखता रहता हूँ। लेकिन मै यह चाहता हूँ की आप अपने छात्र जीवन में इन पुस्तकों को एक बार अवश्य पढ़े। इनसे आपको नयी ऊर्जा और दृष्ठिकोण प्राप्त होगा। इन books के बारे में अधिक जानकारी आप सम्बंधित book को click करके प्राप्त कर सकते है।

मुझे आशा है की यह article आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। धन्यवाद।

        

    

Learn HTML in Hindi

Learn HTML in Hindi 

HTML web pages develop करने के लिए सभी अधिक use होने वाली language है। बाकी सभी web development languages जैसे की CSS, PHP, JavasScript, JSP आदि के लिए HTML किसी base की तरह काम करती है।
यदि आप web development के field में अपना career बनाना चाहते है तो इसके लिए सबसे पहले आपको HTML को ही सीखना होगा। 
HTML की full form Hyper Text Markup Language है। अब तक industry में HTML के कई version launch हो चुके है। HTML का latest version 5 है। इस version को HTML 5 भी कहा जाता है। इस version में कुछ नए tags को add किया गया है। 
HTML सिखने में बहुत ही आसान है। HTML को ठीक तरह से सिखने के लिए Best Hindi Tutorials द्वारा एक Hindi tutorials की series create की गयी है। इस series की सभी tutorials आपको आसान भाषा में simple उदाहरणों के माध्यम से HTML सिखाने के लिए बनाई गयी। आशा है की HTML in Hindi series जरूर पसंद आएगी। 

Table of Contents 

  1. HTML in Hindi : Introduction – इस tutorial में आप HTML के बारे में basic जानकारी प्राप्त करेंगे। Tutorial की शुरआत में HTML को detail से word by word समझाया गया है। इसके बाद आप अलग अलग HTML versions के बारे में जानेंगे। 
  2. HTML in Hindi : Tags – Tags HTML की सबसे महत्वपूर्ण entity होती है। इस tutorial में विभिन्न HTML tags के बारे में जानेंगे। 
  3. HTML in Hindi : Attributes – Attributes किसी भी HTML tag में advanced configuration के  लिए use किये जाते है। इस tutorial में आप attributes और उनके scope के बारे में जानेंगे। साथ ही आप HTML में use होने वाले common attributes के बारे में भी जानेंगे।  
  4. HTML in Hindi : Formatting & Styles – HTML के माध्यम से किसी भी text को format और style किया जा सकता है। इस tutorial में आप HTML के द्वारा text को bold, italic और underline करना सीखेंगे। साथ ही आप text का color change करना, उसकी size change करना, font family बदलना और उसकी position आदि change करना भी सीखेंगे।  
  5. HTML in Hindi : Links – Links के माध्यम से आप एक web page से दूसरे web page पर जाते है। Links किसी web page का अहम् हिस्सा होती है। इस tutorial में आप links को create करना और उन्हें configure करना सीखेंगे।  
  6. HTML in Hindi : Tables – Tables के द्वारा किसी भी information को structured form में represent किया जाता है। HTML के द्वारा आप आसानी से बहुत ही interactive tables create कर सकते है। इस tutorial में आप table create करना, tables को heading देना, colspan attribute, row span attribute और tables को नाम देने के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।  
  7. HTML in Hindi : Images – एक image कई शब्दों का काम करती है। साथ ही images से आप web page भी beautiful लगने लगता है। HTML के द्वारा आप अपने web page में images add कर सकते है। इस tutorial में आप HTML के द्वारा web pages में images include करना, images के लिए alternative text करना, images की size set करना, images की border set करना और images को link बनाना सीखेंगे।  
  8. HTML in Hindi : Lists – Lists के द्वारा महत्वपूर्ण information में सारांश के रूप में show की जाती है। Lists से आपका page और भी interactive लगता है। इस tutorial में आप HTML के माध्यम से web page में list create करना सीखेंगे। इस tutorial में आप ordered list और unordered list के बारे में भी जानेंगे। साथ ही आप list tag के type attribute के बारे में भी इस tutorial में जानेंगे। 
  9. HTML in Hindi : Frames – Frames के माध्यम से आप अपने web page को कई sections में divide कर सकते है। इस tutorial में आप HTML के माध्यम से frames create करना सीखेंगे। साथ ही आप frames को target करना और अलग अलग frame attributes के बारे में जानेंगे।  
  10. HTML in Hindi : Blocks – HTML आपको कई block level tags provide करती है जिनकी मदद से आप web pages में blocks create कर सकते है। इस tutorial में आप div, paragraph और heading आदि block level tags के बारे में जानेंगे। 
  11. HTML in Hindi : Forms – Forms के माध्यम से users से information ली जाती है। User से interact करने के लिए forms बेहद महत्वपूर्ण होते है। HTML आपको different form elements create करने के लिए कई tags provide करती है। इस tutorial में आप textbox create करना, buttons create करना, radio buttons create करना, drop down list create करना और check boxes create करना सीखेंगे।  
  12. HTML in Hindi : Font tag – इस tutorial में आप HTML के द्वारा provide किये गए font tag के बारे में जानेंगे। Font tag के द्वारा आप web page के font को style करते है। इस tutorial में आप font size set करना, font family set करना, font color set करना और HTML file में comments include करना सीखेंगे। 
  13. HTML in Hindi : Embed Tag – इस tutorial में आप HTML के embed tag के बारे में जानेंगे। Embed tag के द्वारा आप अपने web page में media files को include कर पाते है। 
  14. HTML in Hindi : Script & noscript Tags – Web page में programming functionality add करने के लिए scripting languages use की जाती है। अपने web page में किसी scripting language (JavaScript) code को include करने के लिए आप script tag use करते है। Scripting languages के माध्यम से आप web pages को dynamic और interactive बना पाते है।

Learn C language in Hindi

Learn C language in Hindi

सभी modern programming languages जैसे की java, C#, PHP आदि C language के syntax को follow करती है। यही वजह है की computer science students को सबसे पहले C language से introduce किया जाता है।


C language सभी modern programming language का base मानी जाती है। यदि आप C language को अच्छे से समझते जाते है तो बाकी programming languages को भी आसानी से समझ पाएंगे। इसलिए सभी computer science students के लिए C language को ठीक से समझाना अत्यंत आवश्यक है।

Best Hindi Tutorials के द्वारा आपको C language Hindi tutorials की series provide की जा रही है जिससे आप C language को Hindi में ठीक से समझ पाएंगे। आशा करते है की “C language in Hindi” series की सभी tutorials आपको पसंद आएगी। 

Table Of Contents 

  1. Programming in Hindi : What is it? – इस tutorial में आप programming के बारे में जानेंगे। Programming क्या होती है, programming के कौन कौन से components होते है और एक programmer कौन होता है ये सब इस tutorial में बताया गया है।      
  2. C language in Hindi : Introduction – इस tutorial में आप C language के basics के बारे में जानेंगे। C language की History, characteristics, features, limitations और applications के बारे में आप जान पाएंगे।       
  3. C language in Hindi : Tokens, Identifiers & Keywords – इस tutorial में आप जानेंगे की tokens क्या होते है, identifiers क्या होते है और keywords क्या होते है। साथ ही आप C language में यूज़ होने वाले different keywords और character set के बारे में जानेंगे।      
  4. C language in Hindi : Data Types – इस tutorial में आप जानेंगे की data types क्या होते है, C language में ये कितने प्रकार के होते है और इन्हें variables के साथ किस प्रकार यूज़ किया जाता है।  
  5. C language in Hindi : Variables – इस tutorial में आप जानेंगे की variables क्या होते है, अलग अलग type के variables कैसे create किये जाते है। साथ ही आप जानेंगे की constants क्या होते है और इन्हें C language में कैसे create किया जाता है।    
  6. C language in Hindi : First C Program – इस tutorial में आप C program की development life cycle के बारे में जानेंगें। साथ ही आप C program के structure के बारे में जानेंगे और एक basic C program create करना सीखेंगे।   
  7. C Language in Hindi : Flow Charts – Flow charts आपके program का graphical presentation होता है। इस tutorial में आप flow chart symbols को यूज़ करते हुए flow charts create करना सीखेंगे।   
  8. C language in Hindi : Operators – इस tutorial में आप जानेंगे की operators क्या होते है और operands क्या होते है। साथ ही आप जानेंगे की C language में कितने प्रकार के operators होते है और उन्हें आप अपने program में कैसे यूज़ कर सकते है।    
  9. C language in Hindi : Decision Making – इस tutorial में आप decisions के base पर programming statements को execute करना सीखेंगे। साथ ही आप C language में यूज़ होने वाले different decision making statements के बारे में भी जानेंगे।   
  10. C language in Hindi : Looping – इस tutorial में आप जानेंगे की loops क्या होते है? साथ ही आप C language में यूज़ किये जाने वाले विभिन्न loops के बारे में जानेंगे।     
  11. C language in Hindi : Arrays – इस tutorial में arrays के बारे में बताया गया है। Arrays को create करना, initialize करना और display करना इस tutorial में बताया गया है।    
  12. C language in Hindi : Strings – इस tutorial में आप strings के बारे में जानेंगे। C language में strings define करना, initialize करना, gets & puts functions और बहुत से string functions के बारे में आप इस tutorial में जानेंगे।     
  13. C language in Hindi : Functions – Functions structured programming के बहुत ही important element होते है। इस tutorial में आप functions के बारे में जानेंगे। C language में functions create करना, argument pass करना और functions को call करना आप इस tutorial में सीखेंगे।     
  14. C language in Hindi : Structures – इस tutorial में आपको user defined data type से introduce करवाया गया है। Structures को create करना और उनके members को access करना आप इस tutorial में सीखेंगे।   
  15. C language in Hindi : Unions – इस tutorial में आपको unions के बारे में बताया गया है। C language में unions को create करना और उन्हें अलग अलग values के साथ यूज़ करना आप इस tutorial में सीखेंगे।
  16. C Language in Hindi : Recursion – Problems को solve करने के लिए कई function स्वयं कोई ही call करते है, इसके recursion कहा जाता है। इस tutorial में आप recursion और उसके types के बारे में जानेंगे।      
  17. C language in Hindi : Pointers – इस tutorial में आप pointers के बारे में जानेंगे। Pointers की advantages, disadvantages, pointers को declare करना, initialize करना आप इस tutorial में सीखेंगे।      
  18. C language in Hindi : Storage Classes – इस tutorial में आप storage classes के बारे में जानेंगे। साथ ही आप C language में यूज़ होने वाली different storage classes के बारे में इस tutorial में जानेंगे।   
  19. C language in Hindi : File Handling – इस tutorial में आप C language के द्वारा files को handle करना सीखेंगे। C language के माध्यम से files को open करना, close करना, files से read करना और files में write करना आप इस tutorial में जानेंगे।      
  20. C language in Hindi : Error Handling – इस tutorial में आप C programs में आने वाली errors को handle करना सीखेंगे। इस tutorial में आप perror() और strerror() functions को यूज़ करना भी सीखेंगे।      
  21. C language in Hindi : Header Files – इस tutorial में आप header files के बारे में जानेंगे। Header files को create करना, उनके types और header files को यूज़ करने के बारे में भी आप इस tutorial में जानेंगे।    
  22. C language in Hindi : Preprocessor Directives – इस tutorial में आप C language में यूज़ किये जाने वाले different preprocessor directives के बारे में जानेंगे।  

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